तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर उपेंद्र कुशवाहा ने उठाए सवाल, बोले-बिहार के मुद्दों से दूर हैं राजद नेता

तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर उपेंद्र कुशवाहा ने उठाए सवाल, बोले-बिहार के मुद्दों से दूर हैं राजद नेता

पटना, 17 जुलाई (आईएएनएस)। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अपनी लीडरशिप और अंदरूनी घटनाक्रमों के कारण कमजोर हो रही है।

उपेंद्र कुशवाहा ने रोहतास में पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हुए राजनीतिक रूप से अहम समय में, खासकर जब बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव चल रहा है। तेजस्वी यादव की सार्वजनिक रूप से गैर-मौजूदगी पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह सरकार की कमियों को उजागर करे और लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाए, हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव राजनीतिक परिदृश्य से काफी हद तक गायब रहे हैं और बिहार में कई लोग नहीं जानते कि वे कहां हैं।

कुशवाहा ने साफ किया कि किसी व्यक्ति की आवाजाही उसकी निजी स्वतंत्रता का मामला है, लेकिन विपक्ष के नेता का पद जनता के प्रति जवाबदेही के दायरे में आता है।

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, "आरजेडी पहले से ही बिखरती हुई पार्टी है। संवैधानिक रूप से इसके नेता विधानसभा में विपक्ष के नेता का पद संभालते हैं, फिर भी वे कहीं दिखाई नहीं देते। जब नेता ही गायब हो तो पार्टी से क्या उम्मीद की जा सकती है? ठीक यही हो रहा है।"

उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी उन्हें बिहार के आम नागरिकों की चिंताओं को समझने और उन्हें प्रभावी ढंग से उठाने से रोकती है।

आरएलएम प्रमुख ने यह भी दावा किया कि आरजेडी में अंदरूनी तौर पर लोग पार्टी छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगठन के भीतर असंतोष के कारण पार्टी कार्यकर्ता और नेता पार्टी छोड़ रहे हैं।

कुशवाहा की ये टिप्पणियां वरिष्ठ आजेडी नेता और राज्य प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी के पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के कुछ समय बाद आई हैं। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के करीबी माने जाने वाले तिवारी ने इस्तीफा देते समय पार्टी के भीतर अपमान और उपेक्षा का हवाला दिया।

इन टिप्पणियों ने बिहार विधानसभा सत्र और बांकीपुर उपचुनाव से पहले राजनीतिक खींचतान को और बढ़ा दिया है, जहां सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्ष दोनों ही अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

--आईएएनएस

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