टीएमसी नेता कीर्ति आजाद ने बागी सांसदों को बताया 'गद्दार', कहा-एनसीपीआई गैरमान्यता प्राप्त पार्टी

टीएमसी नेता कीर्ति आजाद ने बागी सांसदों को बताया 'गद्दार', कहा-एनसीपीआई गैरमान्यता प्राप्त पार्टी

नई दिल्ली, 16 जून (आईएएनएस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएसी) के सांसद कीर्ति आजाद ने मंगलवार को उन 20 बागी टीएमसी सांसदों पर तीखा हमला बोला, जो 'नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) में शामिल हो गए हैं। उन्होंने उन्हें "गद्दार" कहा और उस राजनीतिक दल की कानूनी स्थिति पर सवाल उठाए जिसमें वे शामिल हुए हैं।

टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा, "टीएमसी ही असली पार्टी है। पॉलिटिकल पार्टी का अर्थ है, उसके पदाधिकारी, कार्यकारी समिति, जिला समिति, ब्लॉक समिति और ग्राम समिति शामिल हैं, जो जमीनी स्तर तक फैली हुई हैं। असली टीएमसी, यानी तृणमूल कांग्रेस पार्टी, दीदी की है। हर कोई जानता है कि यह ममता बनर्जी की पार्टी है और दूसरा गुट गद्दारों की पार्टी है। उन गद्दारों के बीच भी आपसी कलह चल रही है। इस बात पर झगड़ा है कि कौन दो लोग मंत्री बनेंगे। वे यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उनका नेता कौन होगा। दिलचस्प बात यह है कि जिस राजनीतिक पार्टी में वे शामिल हुए हैं, जिसका नाम 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' है, जिसका संसद में एक भी सदस्य नहीं है। फिर भी वे सभी उस पार्टी में शामिल हो रहे हैं। 'नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया' एक गैर-मान्यता प्राप्त और अपंजीकृत पार्टी है। यह वह पार्टी है, जिसका कोई अस्तित्व नहीं है।"

टीएमसी नेता कीर्ति आजाद ने इस कदम को "अलोकतांत्रिक" कहकर आलोचना की और कहा कि 'नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया' की स्थिति को देखते हुए इस विलय का कोई राजनीतिक या कानूनी महत्व नहीं है। यह लोकतांत्रिक नहीं है क्योंकि आप ऐसी पार्टी के साथ कैसे विलय कर सकते हैं, जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं है। वे ऐसी पार्टी में पदों के लिए आपस में लड़ रहे हैं जो संसदीय नक्शे पर मौजूद ही नहीं है।"

कीर्ति आजाद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का प्रयास है कि वह किसी तरीके से 362 का आंकड़ा पा जाए और डिलिमिटेशन (परिसीमन) का बिल पास कराएं। इसके बाद कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र में भी 'ऑपरेशन' होगा। यह भाजपा की रणनीति है। इसकी शुरुआत जनता दल (सेक्युलर) से हुई थी, जहां ऐसी चीजें चुपके से होती थीं। लेकिन पिछले 12 सालों में राजनीति में नैतिकता पूरी तरह खत्म हो गई है। अब राजनीतिक नैतिकता जैसी कोई चीज नहीं बची है। सब कुछ खुलेआम होता है। कई लोगों ने बहुत उम्मीदों के साथ भाजपा से संपर्क किया था।"

सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता दल-बदल विवाद के बीच ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े हैं। कीर्ति आजाद ने कहा, "आम तौर पर विलय जनहित की रक्षा के लिए किया जाता है। ऐसे फैसले कुछ सिद्धांतों और मुद्दों के आधार पर लिए जाते हैं। लेकिन यहां ऐसे कोई मुद्दे नहीं हैं। इसका लोकतंत्र से कोई लेना-देना नहीं है। यह सिर्फ निजी हितों को साधने और स्वार्थ के लिए सत्ता में बने रहने की बात है। यह बात बिल्कुल साफ़ है और हम सब यह जानते हैं। देखते हैं आगे क्या होता है।"

एक सवाल के जवाब में सांसद कीर्ति आज़ाद ने कहा, "उनकी नेता काकोली घोष दस्तीदार, जिन्हें कथित तौर पर कैमरे पर पांच लाख रुपये लेते हुए पकड़ा गया था, उन्होंने कहा कि वे एनडीए का समर्थन करेंगी और एक अलग गुट बनाएंगी। यह भी कहा गया कि उन्होंने खुद को एनसीपीआई नाम की पार्टी में मिला लिया है, लेकिन उस पार्टी का संसद में कोई सदस्य नहीं है और वह कोई मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी भी नहीं है। बागी सांसदों और विधायकों में कोई समन्वय नहीं है। सांसद कहते हैं कि वे अलग गुट बनाएंगे, जबकि विधायक कहते हैं कि वे विपक्ष में रहेंगे।"

--आईएएनएस

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