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टीएमसी के बैंक खातों को ईडी ने किया फ्रीज, सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से किया इंकार

टीएमसी

नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के तीन बैंक खातों को फ्रीज करने के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के फैसले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने पार्टी के रोजमर्रा के खर्चों के लिए पहले से लागू अंतरिम व्यवस्था को जारी रखने की अनुमति दी, जिसकी निगरानी अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी करेंगे।

न्यायमूर्ति एमएम सुंद्रेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें ईडी द्वारा तीन एचडीएफसी बैंक खातों को फ्रीज करने के खिलाफ अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी के बागी नेता बिस्वनाथ दास की अलग याचिका का भी निपटारा कर दिया। उन्होंने दावा किया था कि वही "वास्तविक पार्टी" का प्रतिनिधित्व करते हैं और कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति सुंद्रेश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश संतुलित है क्योंकि इससे पार्टी के दैनिक कामकाज पर असर नहीं पड़ता और खातों के संचालन पर न्यायिक निगरानी भी बनी रहती है।

अदालत ने कहा, "हम इस पर कुछ नहीं कहेंगे। दोनों मामलों का निपटारा करते हैं और इसे हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी के विवेक पर छोड़ते हैं। जो भी कहना हो, मुख्य याचिका में कहिए।"

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुनवाई पार्टी के अलग-अलग गुटों के बीच के विवाद से संबंधित नहीं है। अदालत सिर्फ फ्रीज किए गए बैंक खातों के संचालन से जुड़े सीमित मुद्दे पर विचार कर रही है।

अदालत ने पक्षकारों को यह स्वतंत्रता दी कि वे अपनी-अपनी आपत्तियां विशेष अधिकारी और कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित मुख्य मामले में उठा सकते हैं।

तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि फ्रीज किए गए खातों में 400 करोड़ रुपए से अधिक जमा हैं।

उन्होंने कहा, "सब कुछ फ्रीज कर दिया गया है। हम वेतन नहीं दे सकते, कर्मचारियों को भुगतान नहीं कर सकते। अपराध से जुड़ी राशि से कहीं अधिक पैसे क्यों फ्रीज किए गए हैं? प्राप्तकर्ता खातों को भी फ्रीज किया जा रहा है। यह उचित नहीं है।"

ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि दैनिक खर्चों के लिए खातों के संचालन को लेकर पार्टी को राहत मिली हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि लगभग 120 करोड़ रुपए उपलब्ध हैं और पार्टी के भीतर चल रहे विवाद का भी उल्लेख किया।

एक बागी टीएमसी विधायक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने कहा कि पार्टी के किसी एक गुट को खातों के संचालन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसी विधायक की शिकायत के आधार पर पश्चिम बंगाल पुलिस ने खातों को फ्रीज किया था।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने गुटबाजी के विवाद में पड़ने से इनकार कर दिया और कहा कि मौजूदा अंतरिम व्यवस्था पार्टी के रोजमर्रा के कामकाज से जुड़ी समस्या का समाधान करती है।

यह विवाद टीएमसी के तीन एचडीएफसी बैंक खातों से जुड़ा है। पश्चिम बंगाल पुलिस के निर्देश पर बैंक ने पहले इन खातों पर निकासी संबंधी पाबंदी लगाई थी, जिसके बाद ईडी ने इन्हें फ्रीज कर दिया।

9 जुलाई को कलकत्ता हाई कोर्ट ने पार्टी को इन तीन खातों का इस्तेमाल दैनिक खर्चों और कानूनी खर्चों के लिए करने की अनुमति दी थी, लेकिन इसके लिए कड़ी निगरानी की व्यवस्था की गई थी।

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार को 30 सितंबर तक इन खातों के संचालन के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त किया था।

इस व्यवस्था के तहत तृणमूल कांग्रेस के दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता चेक पर हस्ताक्षर करके राशि निकाल सकते हैं, लेकिन चेक पर विशेष अधिकारी के प्रति-हस्ताक्षर भी जरूरी होंगे।

इन तीन खातों में लगभग 440 करोड़ रुपए जमा हैं। पुलिस को शिकायत मिली थी कि इन पैसों का दुरुपयोग हो सकता है और इनमें भ्रष्टाचार तथा उगाही से जुड़ी रकम शामिल हो सकती है। इसके बाद खातों पर निकासी संबंधी पाबंदी लगा दी गई थी।

मामला बाद में ईडी के दायरे में आ गया, जब एजेंसी ने 23 जून को बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज मूल एफआईआर के आधार पर ईसीआईआर (एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट) दर्ज की।

ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 17(1-ए) के तहत खातों से निकासी पर रोक लगाई। एजेंसी का आरोप है कि लगभग 164 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेनदेन हुए हैं।

तृणमूल कांग्रेस ने इस कार्रवाई को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा था कि खातों को फ्रीज करने का फैसला मनमाना है और ईडी किसी विशेष अपराध से जुड़ी रकम की पहचान या उसे अलग करने में विफल रही है।

--आईएएनएस

एएमटी/पीएम