मुंबई, 8 सितंबर (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के नेता यूसुफ अब्राहनी ने मंगलवार को कई मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने शराबबंदी, नॉनवेज, टीपू सुल्तान, मराठी भाषा विवाद, धार्मिक आयोजनों में दूसरे समुदाय की भागीदारी और दिल्ली में हुए हादसे को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने शराब पर देशभर में प्रतिबंध लगाने की मांग की, जबकि मराठी भाषा सीखने को अच्छा बताते हुए इसे किसी पर जबरन थोपने और भाषा के नाम पर मारपीट या धमकी देने का विरोध किया।
शराबबंदी के मुद्दे पर यूसुफ अब्राहनी ने कहा कि शराब को गलत मानने की बात बहुत पहले से कही जाती रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार शराब के खिलाफ कोई निर्देश जारी करती है तो प्रतिबंध केवल धार्मिक या विशेष दिनों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पूरे साल लागू होना चाहिए। गुजरात में शराबबंदी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि देश के अन्य राज्यों में भी शराब पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। अब्राहनी ने शराब की दुकानों को बंद करने की मांग करते हुए कहा कि इसे सामाजिक बुराई के तौर पर देखा जाना चाहिए।
वहीं, नॉनवेज को लेकर अब्राहनी ने कहा कि इंसान के शरीर में अलग-अलग प्रकार के दांत होते हैं और भोजन की पसंद व्यक्ति की अपनी इच्छा पर निर्भर करती है। उन्होंने दावा किया कि दुनिया की बड़ी आबादी नॉनवेज खाती है और इसे स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।
टीपू सुल्तान को लेकर सवाल किए जाने पर अब्राहनी ने कहा कि उनके बारे में जानकारी की कमी के कारण विवाद पैदा किया जाता है। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग टीपू सुल्तान की भूमिका को स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़कर देखते हैं। हिंदू-मुस्लिम मुद्दों को बार-बार उठाने का उद्देश्य दोनों समुदायों के बीच दूरी पैदा करना है। ऐसे विवादों से राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश की जाती है।
मराठी भाषा विवाद पर सपा नेता ने कहा कि मराठी बहुत प्यारी भाषा है और महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों के लिए इसे सीखना फायदेमंद है। वह खुद भी कुछ मराठी सीख चुके हैं और अपने बच्चों को भी मराठी सीखने के लिए कहते हैं। हालांकि, उन्होंने यूपी, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों से रोजगार के लिए कुछ महीनों के लिए महाराष्ट्र आने वाले लोगों को भाषा सीखने के लिए मजबूर करने का विरोध किया। भाषा सीखना स्वेच्छा से होना चाहिए और इसके लिए किसी को डराना, धमकाना या मारपीट करना गलत है।
अब्राहनी ने कहा कि भारत में हर नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में जाकर रहने और काम करने का अधिकार है। उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) पर माहौल खराब करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाषा के नाम पर हिंसा या दबाव स्वीकार नहीं किया जा सकता।
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की धार्मिक आयोजनों से जुड़ी गाइडलाइंस पर अब्राहनी ने कहा कि यदि किसी धार्मिक आयोजन में आयोजक दूसरे धर्म के लोगों की भागीदारी नहीं चाहते, तो संबंधित समुदाय के लोगों को भी वहां जाने से बचना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि यदि किसी आयोजन को लेकर विवाद की स्थिति बनती है तो वहां जाने से परहेज करें। सभी समुदायों को अपने-अपने धर्म और त्योहारों का सम्मान करते हुए एक-दूसरे को शुभकामनाएं देनी चाहिए। उनके मुताबिक, आपसी सम्मान और सद्भाव से माहौल बेहतर रह सकता है।
दिल्ली में हुए हादसे पर अब्राहनी ने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि खतरनाक इमारतों की पहचान और सुरक्षा को लेकर पहले से व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने कहा कि सर्वे के बाद खतरनाक घोषित इमारतों को खाली कराया जाना चाहिए और लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजने के बाद आवश्यक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में भी कई जर्जर और खतरनाक इमारतों में लोग अब भी रह रहे हैं।
अब्राहनी ने आगे कहा कि भारी बारिश, बाढ़ या भूकंप जैसी स्थिति में ऐसी इमारतों से बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। योजनाएं और व्यवस्थाएं होने के बावजूद भ्रष्टाचार के कारण उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने भवन सुरक्षा के नियमों को सख्ती से लागू करने और खतरनाक इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत बताई।
--आईएएनएस
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