शामली, 24 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के शामली जिले में स्थित त्रिवेणी शुगर मिल में आगामी पेराई सत्र की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। मिल में मेंटेनेंस का करीब 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। पिछले पेराई सत्र के दौरान टरबाइन में आई तकनीकी दिक्कत को देखते हुए इस बार मिल में नई टरबाइन लगाई जा रही है।
मिल प्रबंधन का कहना है कि नई टरबाइन के साथ पेराई सत्र को सुचारु रूप से संचालित करने की तैयारी की जा रही है। साथ ही किसानों के बकाया भुगतान को जल्द पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह जानकारी त्रिवेणी शुगर मिल के यूनिट हेड संजय शर्मा ने दी।
संजय शर्मा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बताया कि सोमवार को जिलाधिकारी की ओर से एक बैठक बुलाई गई थी। बैठक में मुख्य रूप से केन प्राइस लिमिट और चीनी मिलों को जल्द शुरू किए जाने को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि जिन चीनी मिलों की केन प्राइस लिमिट से संबंधित प्रक्रिया अभी बाकी है, उन्हें इसे जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से मिलों को समय पर तैयार करने और पेराई सत्र को जल्द शुरू करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रशासन के निर्देश के मुताबिक चीनी मिलों को अक्टूबर में चलाने की तैयारी की जा रही है। जिलाधिकारी की टीम के साथ मिलों की समीक्षा भी करेंगे और इस दौरान यह प्रयास रहेगा कि सभी जरूरी तैयारियां समय पर पूरी कर मिलों का संचालन जल्द से जल्द शुरू कराया जा सके।
संजय शर्मा के अनुसार, त्रिवेणी शुगर मिल में मेंटेनेंस का काम पेराई सत्र समाप्त होने के बाद से ही लगातार किया जा रहा है। अब तक करीब 60 प्रतिशत मेंटेनेंस कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि पिछले सीजन में टरबाइन में तकनीकी समस्या सामने आई थी, जिससे मिल के संचालन पर असर पड़ा था। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए आगामी पेराई सत्र के लिए नई टरबाइन लगाने का फैसला लिया गया है। नई टरबाइन लगाने का काम फिलहाल जारी है, और प्रबंधन को उम्मीद है कि इसके पूरा होने के बाद मिल को सुचारु तरीके से जल्द शुरू किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि इस बार शुरुआती दौर में गन्ने की रिकवरी कम रहने की संभावना है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों और प्रशासन की ओर से दिए गए निर्देशों को देखते हुए मिल को जल्द चलाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर चीनी मिलों के संचालन से पहले अक्टूबर महीने में गन्ने के सैंपल लेकर उसकी रिकवरी की जांच की जाती है। गन्ने की रिकवरी कई परिस्थितियों पर निर्भर करती है, जिसमें बारिश की स्थिति और बारिश कितनी जल्दी समाप्त हुई, जैसे कारक महत्वपूर्ण होते हैं।
शर्मा ने बताया कि रिकवरी को लेकर वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए 15 सितंबर तक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके बाद गन्ने की गुणवत्ता और रिकवरी की स्थिति का आकलन करते हुए आगे की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। मिल प्रबंधन का लक्ष्य है कि तकनीकी कार्यों और अन्य आवश्यक तैयारियों को समय से पूरा किया जाए, ताकि प्रशासन के निर्देश के अनुरूप आगामी पेराई सत्र को जल्द शुरू किया जा सके। साथ ही किसानों से जुड़े भुगतान और अन्य लंबित प्रक्रियाओं को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
--आईएएनएस
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