नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पहली बार अनाथ बच्चों के भविष्य को लेकर इतना बड़ा मंच सजा। 'स्वनाथ सम्मेलन-2026 : अनाथ से स्वनाथ की ओर' में बाल अधिकारों के दिग्गज और 2,200 स्वनाथ युवा एक साथ एक मंच पर जुटे। सम्मेलन को तीन प्रमुख सत्रों में बांटा गया था। पहले सत्र की शुरुआत सरस्वती वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुई।
दूसरे सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता बीके सिंह ने की। इस सत्र में महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल अधिकार, कानूनी सुरक्षा, स्वास्थ्य, बीमा और कॉरपोरेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने आफ्टर-केयर युवाओं के सामने आने वाली परेशानियों और उनके समाधान पर अपने विचार रखे।
इस सत्र में महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली सरकार की अधिकारी रश्मि सिंह, एसपीएनआईडब्ल्यूसीडी की निदेशक डॉ. संघमित्रा बारिक, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश व्यास, एलआईसी के रीजनल मैनेजर चंद्र सिंह दासपा, विश्व मांगल्य स्वनाथ परिषद की अध्यक्ष अंजलि देव, दिल्ली महिला एवं बाल विकास विभाग के डिप्टी डायरेक्टर एस.एम. अली, टेंपल ऑफ हीलिंग से डॉ. पीयूष सक्सेना, उदयन केयर की चेयरपर्सन किरण मोदी, स्वनाथ अमृता करावन्दे, स्वनाथ पूजा, एम3एम फाउंडेशन से अश्वनी महाजन और कृपा शंकर चौबे समेत कई गणमान्य लोगों ने संबोधित किया।
सत्र की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता बीके सिंह ने कहा कि 18 साल के बाद कई युवा अपने कानूनी अधिकारों, दस्तावेजों, रोजगार, किरायेदारी और बैंकिंग जैसी प्रक्रियाओं को लेकर मुश्किलों का सामना करते हैं। उन्होंने कहा कि ‘स्वनाथ सहायता केंद्र’ के जरिए जरूरतमंद युवाओं को मुफ्त कानूनी सलाह और मार्गदर्शन दिया जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि कोई भी युवा जानकारी या पैसे की कमी के कारण अपने अधिकारों से वंचित न रहे।
राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान की अतिरिक्त निदेशक डॉ. संघमित्रा बारिक ने कहा कि हर बच्चे की परिस्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी योजना का केंद्र सरकारी प्रावधान नहीं, बल्कि बच्चे की वास्तविक जरूरत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों के विकास को सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक सहयोग और कौशल विकास को भी जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चे की पहचान उसकी परिस्थिति से नहीं, उसकी क्षमताओं और सपनों से होनी चाहिए।
दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश व्यास ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित माहौल, शिक्षा और अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने बाल संरक्षण विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई ताकि मदद समय पर पहुंच सके।
वहीं एलआईसी के रीजनल मैनेजर चंद्र सिंह दसपा ने आर्थिक सुरक्षा पर बात की, जबकि किरण मोदी ने युवाओं के लिए लगातार मार्गदर्शन और सामाजिक सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। अन्य वक्ताओं ने भी युवाओं को रोजगार, शिक्षा और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के लिए संस्थागत सहयोग की बात कही।
इस सम्मेलन का मुख्य संदेश "अनाथ से स्वनाथ की ओर: हर बच्चे को स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और स्वावलंबन का अधिकार" रहा।
नई उड़ान ट्रस्ट और विश्व मांगल्य स्वनाथ परिषद के संयुक्त तत्वावधान में तथा गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय और महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली सरकार के सहयोग से 'स्वनाथ सम्मेलन-2026 : अनाथ से स्वनाथ की ओर' का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन विश्वविद्यालय के ईस्ट दिल्ली कैंपस, सूरजमल विहार स्थित कन्वेंशन हॉल में हुआ।
सम्मेलन का उद्देश्य बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले और 18 साल की उम्र के बाद आफ्टर-केयर व्यवस्था में आने वाले युवाओं की चुनौतियों पर चर्चा करना था। साथ ही उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, रोजगार, कानूनी सहायता और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के लिए एक मजबूत सामाजिक सहयोग तंत्र बनाना था।
सम्मेलन में मुख्य तौर पर शिक्षा-संस्कार, मानसिक सहयोग, परिवार से जुड़ाव, कौशल विकास, रोजगार, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे विषयों पर व्यापक मंथन हुआ। इसी दौरान आफ्टर-केयर युवाओं के लिए 'स्वनाथ सहायता केंद्र', 'स्वनाथ रोजगार केंद्र' और 'स्वनाथ स्वास्थ्य केंद्र' का विधिवत विमोचन और उद्घाटन भी किया गया।
--आईएएनएस
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