नई दिल्ली, 7 सितंबर (आईएएनएस)। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना को लेकर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि देश की राजधानी में हादसे को लगभग 24 घंटे बीतने वाले हैं, लेकिन अभी तक मलबा पूरी तरह से हटाया नहीं गया है।
कन्हैया कुमार ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "अभी तक कोई सटीक और स्पष्ट जानकारी नहीं है कि कितने लोगों की जान गई है, कितने लोग मलबे के नीचे दबे हैं और छात्रों की असल हालत क्या है। हमारे लोग वहां लगातार राहत और बचाव कार्य कर रहे थे। शासन-प्रशासन का हाथ बंटा रहे हैं। हम लगातार ग्राउंड जीरो पर डटे हुए हैं और कामना कर रहे हैं कि जो लोग घायल हैं, वे सुरक्षित हों। जो नहीं रहे, उनके परिजनों के साथ हम संवेदना व्यक्त करते हैं।"
एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच अधिकारियों को सस्पेंड किए जाने पर कन्हैया ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इसमें अमित शाह ने इस्तीफा नहीं दिया, पदाधिकारियों की नियुक्ति गृह मंत्रालय से होती है। ऐसे में शाह का नाम क्यों नहीं है, यह दिखाता है कि वे गंभीर नहीं हैं।
उन्होंने कहा, "दिल्ली में भाजपा की पांच इंजन वाली सरकार है। लोकल पार्षद, लोकल विधायक, एमसीडी में मेयर भाजपा का, दिल्ली में सरकार भाजपा की और एलजी भाजपा का। ऐसे में यह लीपा-पोती क्यों कर रहे हैं? हर मामले में यही देखने को मिलता है। पेपर लीक के बाद वे कर्मचारियों को पकड़ रहे थे, एनटीए को भंग नहीं किया। उस समय छात्रों ने कहा कि सरकार को जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी और शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। वैसे ही इस मामले में भी सरकार को जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी।"
कन्हैया कुमार ने मांग करते हुए कहा कि सभी दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार को अपनी जवाबदेही तय करनी चाहिए, जिन छात्रों की जान चली गई है, उनके परिवारों को 1 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जाए और किराए पर नियंत्रण के लिए सरकार को रेंट कंट्रोल एक्ट पास करना चाहिए।
वहीं एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने भी एमसीडी अधिकारियों के सस्पेंशन को नाकाफी बताया। उन्होंने कहा, "यह काफी नहीं है। यह सिर्फ दिखावा है, एक बड़ा झूठ और धोखा है। ऐसी घटनाएं लगातार होती रही हैं। इस बार दबाव बहुत ज्यादा है, क्योंकि हम वहां विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, कुछ दिनों या दो-तीन महीनों बाद आप देखेंगे कि उन सभी को क्लीन चिट दे दी जाएगी। पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। वे दोषी अब कहां हैं? कितनों को सस्पेंड किया गया और कितनों को असल में सजा मिली? यह सब उन्हें बचाने की कोशिश है।"
--आईएएनएस
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