नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में गिरी इमारत के बाद नगर निगम (एमसीडी) अधिकारियों ने बगल की बिल्डिंग को भी तोड़ने की कार्रवाई की है। हालांकि, इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों और छात्रों में अभी भी एमसीडी अधिकारियों के खिलाफ आक्रोश है।
एक छात्रा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इस हादसे के बाद डर लगता है, क्योंकि यह घटना बड़ी थी। हमारी सरकार से यही मांग है कि सुरक्षा रखी जानी चाहिए।
वहीं, एक छात्र ने कहा कि एमसीडी ने जो कार्रवाई अभी की है, उसके लिए पहले कदम उठाए जाने चाहिए थे। नोटिस एक महीने पहले दिया गया था, इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। हादसे के बाद ही एक्शन लिया जाता है। कुछ नेता उसको विवाद बनाकर राजनीति कर रहे हैं।
छात्र ने एमसीडी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कुछ पैसों के चक्कर में छात्रों की जान से खिलवाड़ की जाती है। अभी एमसीडी कमिश्नर को अपना इस्तीफा दे देना चाहिए और पीजी माफियाओं पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
एक स्थानीय महिला ने कहा, "हमारा मानना है कि जितनी भी अवैध और जर्जर इमारतें हैं, उन्हें सील किया जाए और तोड़ा जाए। अन्यथा भविष्य में ऐसी घटनाएं फिर होंगी और बच्चे दबेंगे।"
उन्होंने कहा कि हादसे के बाद कई बच्चे बेघर घूम रहे हैं। उनके पास खाना भी नहीं है। वे गुरुद्वारे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी और नेता अपनी कुर्सियां बचा रहे हैं, इन बच्चों की कोई मदद नहीं कर रहा है।
एक स्थानीय नागरिक ने कहा, "आज इन इमारतों को गिराया जा रहा है, लेकिन जब ये बनती हैं, तब कोई नहीं आता है। असलियत यह है कि कानून सिर्फ किताबों में सिमट कर रह गया है। अपनी जान बचाने के लिए अब एमसीडी के लोग सर्वे में लगे हुए हैं।"
एक अन्य व्यक्ति ने कहा, "जो जर्जर इमारतें हैं, उन्हें तोड़ा ही जाना चाहिए। फिलहाल, हमें बगल की इमारत को तोड़े जाने की जानकारी यहां पहुंचने के बाद मिली, क्योंकि वहां बैरिकेडिंग की गई है।"
--आईएएनएस
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