अयोध्या, 16 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिन लोगों ने सच्ची श्रद्धा से दान नहीं किया, उनका चढ़ावा स्वीकार नहीं हुआ, इस पर आचार्य देवेश जी महाराज ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सतीश महाना का यह बयान दुर्भाग्यपूर्ण है और विधानसभा अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह का बयान देने से पहले धर्म और दान की परंपरा को समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सभी लोगों ने अपनी आस्था और श्रद्धा के अनुसार राम मंदिर के लिए दान दिया है। जो लोग आस्तिक होते हैं, वे धार्मिक कार्यों में योगदान करते हैं।
आचार्य देवेश जी महाराज ने कहा, "राम मंदिर में जिसने भी दान दिया है, चाहे वह किसी भी समाज, वर्ग या राजनीतिक विचारधारा से जुड़ा हो, सभी ने श्रद्धा भाव से योगदान दिया है। उन्हीं लोगों के सहयोग और आस्था से राम मंदिर का निर्माण संभव हुआ है।"
उन्होंने कहा कि यह कहना कि अनास्थावान लोगों का पैसा स्वीकार नहीं हुआ या चोरी हो गया, मंदिर और श्रद्धालुओं की भावनाओं का अपमान है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सामान्य व्यक्ति इस तरह का बयान देता तो अलग बात थी, लेकिन उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के विधानसभा अध्यक्ष द्वारा ऐसा बयान देना चिंतनीय है।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी अपील की कि उनके सहयोगी किस तरह के बयान दे रहे हैं, इस पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह का बयान समाजवादी पार्टी या कांग्रेस के नेताओं की ओर से आता तो समझ में आता, क्योंकि वे सनातन परंपरा के विरोधी हैं, लेकिन जो लोग सनातन संस्कृति के ठेकेदार बनते हैं, उनके द्वारा इस तरह की बयानबाजी करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
हाल ही में वायरल हुए मौलाना जर्जिस अंसारी के उस वीडियो पर भी उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें मौलाना ने श्रीमद्भगवद्गीता का हवाला देते हुए भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम बताया था। आचार्य देवेश जी महाराज ने कहा कि मौलाना जर्जिस अंसारी की बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी है और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण के बारे में सही जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा, "अगर वह भगवान श्रीकृष्ण को अपने पूर्वज, आदर्श या सम्माननीय व्यक्तित्व के रूप में देखते तो यह एक अलग बात होती, लेकिन इस तरह के निराधार बयान देना दुर्भाग्यपूर्ण है।"
उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी समाज में अशांति फैलाने का काम करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब लोगों के पास कोई मुद्दा नहीं होता तो वे समाज में अपनी पहचान बनाए रखने के लिए इस तरह के बयान देते हैं। ऐसे बयान पूरी तरह निरर्थक हैं और समाज को भ्रमित करने वाले हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा समान नागरिक संहिता को लेकर दिए गए बयान पर आचार्य देवेश जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम ने पति धर्म का पालन किया और इसी कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है।
उन्होंने कहा, "भगवान राम ने समाज को मर्यादा और आदर्शों का पाठ पढ़ाया। उन्होंने बताया कि परिवार में पिता-पुत्र, माता-पुत्र, भाई-भाई और अन्य रिश्तों के बीच संबंध कैसे होने चाहिए।"
उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को भगवान राम के आदर्शों और चरित्र को अपने जीवन में अपनाना चाहिए, चाहे वह किसी भी धर्म या समुदाय से जुड़ा हो। उन्होंने कहा कि भगवान राम के आदर्शों को अपनाने से परिवार संस्कारवान, व्यवस्थित और विकासशील बन सकता है।
वहीं, हैदराबाद में हिंदू बच्चे को कलमा और कुरान पढ़ने का होमवर्क दिए जाने के मामले पर आचार्य देवेश जी महाराज ने कहा कि ऐसी घटनाएं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि कई बार स्कूलों में बच्चों पर किसी विशेष धर्म से जुड़ी चीजें पढ़ने या बोलने का दबाव बनाने की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे पर उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी धर्म विशेष की शिक्षा थोपना गलत है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को इस विषय पर ध्यान देना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। उन्होंने मांग की कि संबंधित स्कूल और शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
कांवड़ यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस की तैयारियों पर आचार्य देवेश जी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सुरक्षा को लेकर हमेशा तत्पर रहती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सनातन संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों से लेकर मंदिरों तक श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी श्रद्धालु को किसी प्रकार की असुविधा न हो और यात्रा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।
--आईएएनएस
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