logo

सरकार ने वित्त वर्ष 2027 में अब तक विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन से जुटाए 26,639 करोड़ रुपए से ज्यादा

सरकार ने वित्त वर्ष 2027 में अब तक विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन से जुटाए 26,639 करोड़ रुपए से ज्यादा

नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में (22 जुलाई तक) विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन के जरिए कुल 26,639.33 करोड़ रुपए जुटाए हैं। संसद में सोमवार को दी गई जानकारी के अनुसार, इसमें 20,272.40 करोड़ रुपए केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (सीपीएसई) में हिस्सेदारी बेचने (ऑफर फॉर सेल- ओएफएस) से प्राप्त हुए हैं, जबकि 6,366.93 करोड़ रुपए एसेट मोनेटाइजेशन से हासिल किए गए हैं।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 से अलग से विनिवेश लक्ष्य तय करना बंद कर दिया है। हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान (बीई) में 80,000 करोड़ रुपए को 'मिसलेनियस कैपिटल रिसीट्स' के तहत रखा गया है, जिसमें सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी और सार्वजनिक परिसंपत्तियों के प्रबंधन से विभिन्न माध्यमों के जरिए मिलने वाली अनुमानित आय शामिल है।

सरकार ने स्पष्ट किया कि विनिवेश एक सतत प्रक्रिया है और किसी भी सौदे को पूरा करने का समय बाजार की स्थिति, घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, भू-राजनीतिक घटनाक्रम, निवेशकों की रुचि और प्रशासनिक तैयारियों जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। साथ ही, चूंकि विनिवेश से जुड़े लेनदेन बाजार के लिहाज से संवेदनशील होते हैं, इसलिए इनके लिए पहले से कोई निश्चित समयसीमा तय करना संभव नहीं है।

डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (डीआईपीएएम) के आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष के शुरुआती तीन महीनों से कुछ अधिक समय में ही सरकार की विनिवेश से हुई आय पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक रही है।

वर्तमान में शेयर बाजार में 68 केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (सीपीएसई) सूचीबद्ध हैं, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी का कुल मूल्य 22.80 लाख करोड़ रुपए से अधिक है। इसके अलावा, 16 सार्वजनिक वित्तीय संस्थान (बैंक और बीमा कंपनियां) भी सूचीबद्ध हैं, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी का मूल्य लगभग 19 लाख करोड़ रुपए है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में सात कंपनियों में ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिए हिस्सेदारी बेची गई, जिनमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से 2,200 करोड़ रुपए से अधिक, कोल इंडिया से 5,500 करोड़ रुपए से अधिक, एनएचपीसी से 4,300 करोड़ रुपए से अधिक, एनएलसी इंडिया से 1,200 करोड़ रुपए से अधिक, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (जीआईसी) से 3,000 करोड़ रुपए से अधिक, इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (आईआरएफसी) से 2,000 करोड़ रुपए से अधिक और कोचीन शिपयार्ड से 1,700 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जुटाई गई।

ओएफएस एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत किसी सूचीबद्ध कंपनी के प्रमोटर या बड़े शेयरधारक स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी आम निवेशकों को बेच सकते हैं। यह प्रक्रिया आईपीओ (आईपीओ) या एफपीओ (एफपीओ) की तुलना में कम दस्तावेजी औपचारिकताओं वाली और अधिक तेज मानी जाती है।

सरकार ने बताया कि इनविट्स और रीट्स के माध्यम से एसेट मोनेटाइजेशन ने भी नए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने और वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनविट्स ऐसे विशेष निवेश फंड होते हैं, जो निवेशकों को बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निवेश का अवसर देते हैं।

पहले इस तरह के निवेश केवल बड़े संस्थागत निवेशकों तक सीमित थे, लेकिन इनविट्स के जरिए आम निवेशक भी इन परियोजनाओं में भागीदारी कर सकते हैं। इससे एक ओर निवेशकों को नियमित आय और दीर्घकालिक रिटर्न की संभावना मिलती है, वहीं दूसरी ओर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने में भी मदद मिलती है।

--आईएएनएस

डीबीपी