नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएस)। जोधपुर में एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की खराब सेहत के आधार पर अंतरिम जमानत की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम बापू की जमानत याचिका पर फैसले के लिए एम्स से विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट मांगी है।
पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से कहा था कि वह आसाराम की मेडिकल रिपोर्ट की जांच करे। कोर्ट ने राजस्थान सरकार से कहा था कि वो बताए कि क्या उनकी स्वास्थ्य स्थिति ऐसी है कि क्या उन्हें कुछ समय के लिए अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए। हालांकि राजस्थान सरकार ने आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका का विरोध किया है।
राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि आसाराम फिलहाल स्वस्थ हैं और करीब तीन महीने पहले वे अयोध्या तथा काशी विश्वनाथ मंदिर गए थे, जहां उन्होंने पैदल भ्रमण भी किया था। उन्होंने कहा कि आसाराम को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (पाचन तंत्र) संबंधी समस्या के कारण रक्तस्राव की शिकायत है, जो फिलहाल अस्थायी प्रतीत होती है और उनका इलाज चल रहा है। साथ ही, उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संबंधित अधिकारियों से ताजा निर्देश लेकर अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखेगी।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, "यदि उनकी हालत इतनी गंभीर नहीं है तो बात अलग है लेकिन यदि स्थिति गंभीर हुई तो हम नहीं चाहते कि बाद में किसी पर आरोप लगे।" वहीं, आसाराम की ओर से पेश वकील ने अदालत में दलील दी थी कि उनके मुवक्किल की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर है और उन्हें अभी भी उच्च जोखिम बना हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह पहले राज्य सरकार की मेडिकल रिपोर्ट पर आधारित राय का इंतजार करेगा। यदि स्वास्थ्य स्थिति वास्तव में गंभीर पाई जाती है, तो केवल इलाज के उद्देश्य से सीमित अवधि के लिए अंतरिम जमानत देने पर विचार किया जा सकता है।
बता दें कि आसाराम को वर्ष 2018 में जोधपुर स्थित विशेष पॉक्सो अदालत ने अपने आश्रम में एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा है। इसके अलावा, आसाराम गुजरात में अपनी एक महिला शिष्या के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में भी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अंतरिम मेडिकल जमानत पर बाहर चल रहे आसाराम ने 28 मई को जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण कर दिया था।