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स्पीकर पर हमला लोकतंत्र पर एक स्थायी दाग, बीआरएस का अहंकार और सामंती सोच उजागर: भट्टी विक्रमार्का

स्पीकर

हैदराबाद, 9 सितंबर (आईएएनएस)। तेलंगाना के डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्का ने स्पीकर गड्डम प्रसाद कुमार के प्रति विपक्षी बीआरएस सदस्यों की टिप्पणियों और व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह घटना पूरे लोकतंत्र पर एक स्थायी दाग ​​है। यह सिर्फ एक व्यक्ति का अपमान नहीं बल्कि पूरी विधानसभा का गंभीर अपमान है।

विधानसभा में बोलते हुए डिप्टी सीएम ने मंत्री दामोदर राजनरसिम्हा द्वारा पेश प्रस्ताव को अपना पूरा समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि स्पीकर की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति सिर्फ एक व्यक्ति नहीं होता बल्कि सदन की गरिमा, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक कामकाज का प्रतीक होता है। स्पीकर का अपमान पूरी विधानसभा का अपमान है और ऐसा व्यवहार सदन की अवमानना ​​के बराबर है।

भट्टी विक्रमार्का ने याद दिलाया कि गड्डम प्रसाद कुमार को सभी दलों के सदस्यों ने स्पीकर चुना था और उन्हें सदन की कार्यवाही चलाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने कहा कि स्पीकर का दलित पृष्ठभूमि से होना सम्मान की एक और बात है लेकिन उन्हें सिर्फ 'दलित स्पीकर' के तौर पर देखना सही नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, "वह पूरी विधानसभा के स्पीकर हैं।"

उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना इस बात का जीता-जागता सबूत है कि बीआरएस अभी भी अपनी पुरानी सामंती और जमींदार वाली सोच से बाहर नहीं निकल पाई है। दलित समुदाय से आने वाले और स्पीकर की कुर्सी पर बैठे प्रसाद कुमार के साथ जो बदसलूकी की गई, वह बीआरएस के असली स्वभाव को दिखाती है। भट्टी विक्रमार्क ने आरोप लगाया, "सत्ता गंवाने का गम बर्दाश्त न कर पाने और राज्य को फिर से अपने नियंत्रण में लाने की मंशा से बीआरएस नेतृत्व ऐसी साज़िशें रच रहा है।"

भट्टी विक्रमार्क ने शक जताया कि विधानसभा में हुआ हंगामा कोई अकेली घटना नहीं थी और इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा सत्र से एक दिन पहले एक फार्महाउस पर बीआरएस विधायक दल की बैठक हुई थी और जिसे उन्होंने "फार्महाउस साजिश" कहा, उसी दौरान लोकतंत्र पर हमला करने की योजना बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि विधानसभा में कुछ बीआरएस विधायकों ने साज़श रचने वालों के इशारे पर काम किया, जबकि इसके मुख्य सूत्रधार बीआरएस का शीर्ष नेतृत्व था।

डिप्टी सीएम ने विधानसभा में नारे लिखी टी-शर्ट और काली शर्ट पहनकर आने वाले बीआरएस सदस्यों की भी आलोचना की। उन्होंने बताया कि पिछली बीआरएस सरकार के समय बने नियमों में ही सदन के अंदर बैज और प्रदर्शन वाले दूसरे निशान पहनने पर रोक लगाने का प्रावधान है।

उन्होंने कहा, "यह अजीब बात है कि बीआरएस सदस्य स्पीकर के उन नियमों को लागू करने का विरोध कर रहे हैं, जो उनकी अपनी सरकार ने ही बनाए थे।" उन्होंने स्पीकर के खिलाफ अपशब्द और असंसदीय भाषा इस्तेमाल करने के औचित्य पर सवाल उठाया, जबकि स्पीकर ने सिर्फ सदन के नियमों को लागू किया था।

भट्टी विक्रमार्क ने स्पीकर की मां के खिलाफ कथित तौर पर की गई गलत टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ दलित समुदाय से जुड़ा नहीं है, बल्कि तेलंगाना समाज की संस्कृति, मूल्यों और महिलाओं के प्रति सम्मान से भी जुड़ा है। उन्होंने बताया कि सरकार महिलाओं के आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए कई कार्यक्रम चला रही है। ऐसे में किसी महिला, खासकर स्पीकर की मां के खिलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी करना बेहद दुखद और अस्वीकार्य है।

डिप्टी सीएम ने याद दिलाया कि उन्होंने पहले विपक्ष में दस साल बिताए हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया या विधानसभा में घुसने से रोका गया, तब भी उन्होंने लोकतंत्र और स्पीकर के पद का सम्मान किया।

उन्होंने कहा, "जब मुझे माइक नहीं दिया गया या सदन में घुसने से रोका गया, तब भी मैंने एक दिन भी अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं किया। हमने स्पीकर के पद का सम्मान किया।"

भट्टी विक्रमार्क ने आरोप लगाया कि बीआरएस का तरीका पूरी तरह से 'लोकतंत्र की भावना' को कमजोर कर रहा है। इस तरह की साजिश रचने वाली ताकतें लोकतंत्र के लिए खतरा हैं और विधानसभा से अपील की कि वह कथित 'फार्महाउस साजिश' की साफ तौर पर निंदा करे। उन्होंने कहा कि यह और भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्पीकर से जुड़ी घटना के बाद बीआरएस नेताओं को पछतावा नहीं है। बार-बार स्पीकर की कुर्सी को निशाना बनाना और ऐसे हालात पैदा करना जिनमें सदस्य आक्रामक तरीके से स्पीकर की ओर बढ़ें, लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।

डिप्टी सीएम ने याद दिलाया कि तेलंगाना का जन्म आत्मसम्मान की लड़ाई से हुआ था। उन्होंने कहा कि तेलंगाना के लोगों ने भेदभाव और अपमान के खिलाफ दशकों तक संघर्ष किया है। उन्होंने चेतावनी दी, "ऐसे संघर्ष से बने तेलंगाना में हम सामंती सोच या ज़मींदारों, जागीरदारों और दबदबे वाले वर्गों की मानसिकता को फिर से पनपने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे।"

भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और व्यक्ति की गरिमा पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि भेदभाव और अपमान, जो इन संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन करते हैं, लोकतंत्र की भावना के खिलाफ हैं।

--आईएएनएस

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