तिरुवनंतपुरम, 8 जून (आईएएनएस)। केरल विधानसभा में चुनावी करारी हार के बाद सीपीआई (एम) की राज्य इकाई ने असामान्य रूप से स्पष्ट आत्ममंथन करते हुए कई राजनीतिक गलतियों को स्वीकार किया है। वहीं, पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं में नेतृत्व शैली, कार्यप्रणाली और संगठनात्मक संस्कृति को लेकर गहरी चिंताएं भी सामने आई हैं। राज्य समिति सोमवार को सचिवालय की इस रिपोर्ट पर चर्चा करेगी।
चुनाव में हुई करारी हार की समीक्षा करने वाली सचिवालय की रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि पार्टी ने एसएनडीपी योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन से दूरी न बनाकर गलती की और थालीपरम्बा में उम्मीदवार चयन में गंभीर चूक की।
रिपोर्ट में अय्यप्पा संगमम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संदेश पढ़े जाने से जुड़े विवाद का भी जिक्र है, जिसमें कहा गया है कि इससे कार्यक्रम का महत्व कम हुआ और पार्टी को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचा।
हालांकि, सूत्रों के अनुसार, पार्टी के विभिन्न स्तरों पर हुई चर्चाएं इन विशिष्ट मुद्दों से कहीं आगे तक गईं।
क्षेत्रीय, जिला और राज्य स्तरीय बैठकों में बार-बार यही बात सामने आई कि हार का एक बड़ा कारण पिनारयी विजयन की कार्यशैली थी और कई सदस्यों ने इसे नेतृत्व से जुड़ी उनकी अहंकारी छवि बताया।
राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन के कार्य करने के तरीके की भी आलोचना हुई और कई सदस्यों ने पार्टी नेतृत्व द्वारा कार्यकर्ताओं और जनता से बातचीत के तरीके पर असंतोष व्यक्त किया। आलोचनाओं के बावजूद रिपोर्ट में कहा गया है कि पिनारयी विजयन को विपक्ष का नेता (एलओपी) नियुक्त करने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि विजयन का शक्तिशाली राज्य सचिवालय में अभी भी काफी प्रभाव है और इसी कारण व्यापक नेतृत्व समीक्षा की मांग के बावजूद उन्हें शीर्ष पद पर बने रहने में मदद मिली।
चुनावी हार पर विस्तार से चर्चा करने के लिए विशेष राज्य पूर्ण सत्र बुलाने की मांगों को नेतृत्व द्वारा सफलतापूर्वक टालना भी उतना ही महत्वपूर्ण था।
पार्टी के कई सदस्यों का मानना था कि इस तरह की पूर्ण बैठक से विजयन और गोविंदन दोनों की भूमिकाओं की गहन जांच होगी और जवाबदेही पर एक व्यापक बहस का द्वार खुल जाएगा।
इसके बजाय पार्टी ने निचली समितियों में चर्चा का एक और दौर आयोजित करने और सुधारात्मक उपायों को लागू करने के लिए तीन महीने का समय देने का विकल्प चुना है। यह सुधार का संकेत तो देता है, लेकिन नेतृत्व में कोई बड़ा बदलाव नहीं।