नई दिल्ली, 20 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस ने सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'चलो संसद' प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की बहुआयामी जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि झड़पों में शामिल लोगों की पहचान करने के अलावा, जांचकर्ता इस बात की भी पड़ताल करेंगे कि क्या इस अशांति के पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र था।
हिंसा के संबंध में 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि विभिन्न स्थानों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर कई एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित तौर पर बैरिकेड तोड़कर और सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प के दौरान कम से कम 50 पुलिसकर्मी घायल हो गए।
दिल्ली पुलिस सूत्रों के अनुसार, नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ ऐसे लोगों को भी हिरासत में लिया गया है, जो वास्तव में छात्र नहीं हैं। सूत्रों ने बताया कि जांच के तहत उनकी पहचान, संबद्धता और हिंसा में उनकी भूमिका की पुष्टि की जा रही है।
पुलिस सूत्रों ने आगे बताया कि जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या हिंसा पूर्व नियोजित थी या संगठित समूहों द्वारा भड़काई गई थी। जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने और हिंसा भड़काने के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।
जांच का एक और महत्वपूर्ण पहलू तनाव बढ़ाने में सोशल मीडिया की भूमिका है। सूत्रों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन से पहले और उसके दौरान कई संदिग्ध सोशल मीडिया खातों ने भ्रामक और भड़काऊ सामग्री प्रसारित की। जांचकर्ताओं ने अशांति फैलाने के स्पष्ट प्रयास में झड़पों के संबंध में गलत जानकारी फैलाने वाली कई पोस्टों की पहचान की है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान स्थित सोशल मीडिया हैंडल्स से कथित तौर पर प्रसारित कई पोस्टों ने हिंसा को बढ़ावा दिया और अपुष्ट दावे फैलाए। एक व्यापक रूप से साझा की गई पोस्ट में झूठा दावा किया गया कि झड़पों के दौरान सात प्रदर्शनकारी मारे गए, 391 लोग घायल हुए और 250 लोगों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने कहा कि ये दावे निराधार थे और इनका उद्देश्य दहशत फैलाना और अधिक अशांति पैदा करना प्रतीत होता है।
दिल्ली पुलिस ऐसे पोस्टों के स्रोत का पता लगाने और यह निर्धारित करने के लिए साइबर विशेषज्ञों के साथ समन्वय कर रही है कि क्या विरोध प्रदर्शन के दौरान गलत सूचना फैलाने के लिए कोई समन्वित ऑनलाइन अभियान चलाया गया था।
सूत्रों ने आगे कहा कि यदि जांच में हिंसा की योजना बनाने, उसे भड़काने या वित्तपोषण करने में किसी राजनीतिक संगठन या व्यक्ति की संलिप्तता साबित होती है, तो राजनीतिक संबद्धता की परवाह किए बिना उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
--आईएएनएस
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