नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने जीएसटी रेवेन्यू ग्रोथ के अपने हिसाब-किताब की आलोचना को खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि तुलना एक जैसे आधार पर की जानी चाहिए, न कि अलग-अलग टैक्स बेस के बीच।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (सीबीआईसी) ने बुधवार को एक बयान में कहा कि हर महीने जारी होने वाले जीएसटी रेवेन्यू के आंकड़े पूरी जानकारी के साथ जीएसटी रेवेन्यू परफॉर्मेंस की सही तस्वीर दिखाते हैं।
सीबीआईसी के बयान में कहा गया है कि जीएसटी काउंसिल ने तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों को छोड़कर बाकी सभी चीजों पर 22 सितंबर, 2025 से कंपनसेशन सेस को बंद करने का फैसला किया था। तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों पर सेस भी 1 फरवरी, 2026 से हटा दिया गया था। इसलिए, इस अवधि के लिए कोई सेस कलेक्शन नहीं हुआ।
इसे देखते हुए, नवंबर 2025 (जीएसटी रेट में बदलाव के बाद पहला टैक्स पीरियड) से, पब्लिक डोमेन में जारी जीएसटी रेवेन्यू के आंकड़ों में कंपनसेशन सेस को नीचे एक टेबल में अलग से दिखाया गया था, और साल-दर-साल ग्रोथ की गणना संबंधित अवधियों के लिए सीजीएसटी, एसजीएसटी और आईजीएसटी वाले टैक्स बेस पर की गई थी। बयान में कहा गया है कि पूरी जानकारी देने के लिए एक फुटनोट भी शामिल किया गया था।
सीबीआईसी ने कहा, "ग्रोथ रेट तभी सार्थक होती है जब उसकी गणना तुलना करने लायक आधार पर की जाए, यानी तुलना के दोनों तरफ़ एक ही तरह के लेवी (टैक्स) हों। नहीं तो, यह सेब और संतरे की तुलना करने जैसा है। ग्रोथ के आंकड़े का मकसद यह दिखाना है कि टैक्स बेस में कैसे बदलाव आया है। हर महीने जारी होने वाले जीएसटी रेवेन्यू के आंकड़े पूरी जानकारी के साथ जीएसटी रेवेन्यू परफॉर्मेंस की सही तस्वीर दिखाते हैं। जब कोई लेवी कानून में खत्म हो गई हो, तो उसे बेस में बनाए रखने से कुछ और ही पता चलता है। यह न तो गणितीय रूप से सही है और न ही इसका कोई तार्किक मतलब है।"
सीबीआईसी के बयान में आगे कहा गया, "इसलिए, दो अलग-अलग टैक्स बेस से आंकड़ों को चुनकर पेश करने की कोई भी कोशिश पूरी तरह से गुमराह करने वाली और शरारतपूर्ण है। सही विश्लेषण के लिए एक जैसी चीजों की तुलना होनी चाहिए, न कि दो बुनियादी रूप से अलग डेटासेट की तुलना करके नागरिकों को गुमराह किया जाना चाहिए।"
--आईएएनएस
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