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सीएम ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया, राहत और बचाव कार्यों का जायजा लिया

बिहार

पटना, 4 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ गई है। कई नदियों में जलस्तर लगातार बढ़ रहा था और प्रमुख बैराजों से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और चल रहे राहत और बचाव कार्यों का जायजा लिया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने हवाई सर्वेक्षण के जरिए बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया और प्रशासन द्वारा किए जा रहे राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित इलाकों में लोगों को समय पर मदद पहुंचाने, उनकी मुश्किलें कम करने और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तेजी से और प्रभावी कदम उठाए जाएं।

जल संसाधन विभाग के शुक्रवार दोपहर 2 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, सोन, कोसी और गंडक बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा था।

सबसे ज्यादा पानी का बहाव इंद्रपुरी स्थित सोन बैराज में दर्ज किया गया, जहां बहाव में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही थी।

सोन बैराज से पानी का बहाव तीन घंटे की अवधि में लगातार बढ़ा। सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच बहाव में 43,741 क्यूसेक की बढ़ोतरी हुई। विभाग ने सोन बैराज की डिजाइन डिस्चार्ज क्षमता 14.58 लाख क्यूसेक बताई है।

बढ़ते बहाव के कारण सोन नदी के जलस्तर और निचले व आस-पास के इलाकों, खासकर गांवों और निचले इलाकों की स्थिति पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

इसी दौरान बीरपुर स्थित कोसी बैराज से पानी का बहाव तुलनात्मक रूप से स्थिर रहा।

शुक्रवार सुबह 11 बजे बहाव 2,02,310 क्यूसेक दर्ज किया गया। दोपहर में यह घटकर 1,94,100 क्यूसेक हो गया और दोपहर 1 बजे व 2 बजे यह 1,91,175 क्यूसेक रहा।

जल संसाधन विभाग ने कोसी बैराज पर स्थिति को स्थिर बताया, जिसका मतलब है कि पिछले कुछ घंटों में बहाव में कोई खास बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई।

हालांकि, जलस्तर में बदलाव के प्रति कोसी नदी की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिकारी नदी और उसके तटबंधों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं।

वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक पानी का बहाव 1,42,800 क्यूसेक पर स्थिर रहा। विभाग ने वहां के ट्रेंड को स्थिर बताया है।

गंडक बैराज की डिजाइन डिस्चार्ज क्षमता 8.50 लाख क्यूसेक है।

गंडक नदी के किनारे के इलाकों में पहले से ही बाढ़ और जलभराव की स्थिति बनी हुई है, इसलिए अधिकारी निचले इलाकों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।

डिस्चार्ज में अचानक कोई भी बदलाव नदी के किनारे रहने वाले लोगों पर और असर डाल सकता है।

शुक्रवार दोपहर 2 बजे तक, तीन प्रमुख बैराजों में से सोन बैराज से सबसे ज्यादा पानी छोड़ा जा रहा था। लगभग 5.18 लाख क्यूसेक; इसके बाद कोसी से 1.91 लाख क्यूसेक और गंडक से 1.42 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया।

जहां कोसी और गंडक बैराजों पर डिस्चार्ज का ट्रेंड स्थिर रहा, वहीं सोन बैराज पर पानी का स्तर बढ़ने का ट्रेंड प्रशासन के लिए चिंता का मुख्य विषय बन गया है।

जल संसाधन विभाग ने साफ किया है कि इस ट्रेंड का आकलन पिछले दो घंटों के डेटा के आधार पर किया जाता है और डिस्चार्ज के आंकड़े लगातार बदल सकते हैं।

बिहार के कई हिस्सों में नदियों का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ से जुड़ी समस्याओं का सामना करने के बीच, प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। जोखिम वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों और सलाहों का पालन करने की सलाह दी गई है, जबकि अधिकारी नदियों के जलस्तर और बैराज से छोड़े जा रहे पानी की लगातार निगरानी कर रहे हैं।

--आईएएनएस

डीकेएम/डीएससी