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साध्वी निरंजन ज्योति ने मुख्तार नकवी को बांधी राखी, भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का दिया संदेश

साध्वी

नई दिल्ली, 28 अगस्त (आईएएनएस)। रक्षाबंधन के अवसर पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी और राज्यसभा सदस्य एवं प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी को राखी बांधी।

इस अवसर पर साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा, "आज बहुत महत्वपूर्ण दिन है, जब एक धागे से भाई-बहन के बीच का बंधन मजबूत होता है। ये सिर्फ धागे नहीं हैं बल्कि प्यार के बंधन हैं जो भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करते हैं। मुझे बहुत खुशी है कि 35 साल से भी ज्यादा समय से मैं अपने भाई नकवी को यह राखी बांध रही हूं।"

उन्होंने कहा, "मैं यह कह सकती हूं कि साधु जीवन में, राजनीतिक जीवन में या गृहस्थ जीवन में संबंधों और रिश्तों का बहुत बड़ा महत्व होता है। सबमें अगर रिश्ते मजबूत हैं, तो हर परिस्थिति में जी सकते हैं, अगर रिश्ते अच्छे नहीं हैं, तो मन खुश नहीं रह सकता।"

मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, "दीदी निरंजन ज्योति ने जो प्यार और स्नेह हमें दिखाया है, वह सिर्फ सालों से नहीं बल्कि दशकों से है और वह हर रक्षाबंधन पर दिखता है। हमारा भारत दुनिया की सबसे पुरानी, सबसे मजबूत, सबसे अर्थपूर्ण और सबसे व्यापक सभ्यता है। इसीलिए हमारी सभ्यता के संदेश और शिक्षाएं पूरी दुनिया में व्यापक रूप से स्वीकार की जाती हैं और उनका सम्मान किया जाता है। रक्षाबंधन उसी सभ्यता और संस्कृति का हिस्सा है।"

उन्होंने शुभकामनाएं देते हुए कहा, "मेरी यही शुभकामना है कि साध्वी निरंजन ज्योति लगातार पूरी ताकत और शक्ति के साथ इस काम में लगी हुई हैं और मजबूती के साथ उसे करती रहें।"

राज्यसभा सदस्य एवं प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी राखी बंधवाने के बाद कहा, "आज रक्षाबंधन का त्योहार है। प्राचीन काल से ही पूरे समाज की रक्षा का दायित्व संभालने वाले शासकों को यह धागा बांधा जाता रहा है।"

उन्होंने कहा, "आज कुछ लोग ऐसे हैं जो आदतन विभिन्न मुद्दों पर अनावश्यक बयान देते हैं और भारतीय संस्कृति को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। मैं उन्हें यह भी याद दिलाना चाहता हूं कि संपत्ति में बहनों को हिस्सा देने का पहला उदाहरण मनुस्मृति में मिलता है। मनु और याज्ञवल्क्य की स्मृतियों में कहा गया है कि बहनों को कुल हिस्से का एक-चौथाई हिस्सा दिया जाना चाहिए। डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने 24 फरवरी 1949 को भारत की संसद में इसका उल्लेख किया था।" उन्होंने कहा कि जो लोग भारतीय समाज के सकारात्मक पहलुओं में भी नकारात्मकता खोजते हैं, उन्हें इन बातों से सीखना चाहिए।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम