नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने लंबे समय से फरार आरोपी हरनेक सिंह को अमेरिका से सफलतापूर्वक भारत वापस लाने में कामयाबी हासिल की है। वह 2013 से जांच और मुकदमे से बच रहा था।
सीबीआई ने गुरुवार को जानकारी दी कि आरोपी हरनेक सिंह के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस और लुक-आउट सर्कुलर जारी थे। उसे अमेरिका से डिपोर्ट किया गया। बुधवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचने पर सीबीआई अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी ने बताया कि उसे जल्द ही हरियाणा के पंचकूला में स्पेशल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाएगा।
सीबीआई ने 2016 में आईपीसी के तहत साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और नकली दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत अपराधों के लिए मामला दर्ज किया था। जांच से पता चला कि 2013 के दौरान, सिंगापुर में रहने वाले या काम करने वाले भारतीय नागरिकों से ठगों ने फर्जी फोन कॉल के जरिए संपर्क किया था। ये आरोपी सिंगापुर इमिग्रेशन अधिकारियों के तौर पर बात करते थे।
सीबीआई के अनुसार, आरोपियों की तरफ से पीड़ित लोगों को गलत जानकारी दी गई थी। आरोपियों ने उनसे कहा था कि उन्होंने एयरपोर्ट पर अपने डिसएम्बार्केशन फॉर्म में गलत जानकारी भरी है। उन पर आपराधिक मुकदमा चल सकता है और उन्हें डिपोर्ट किया जा सकता है। इसके बाद आरोपियों की ओर से लोगों को वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के जरिए भारत में तय प्राप्तकर्ताओं को कथित सेटलमेंट फीस या जुर्माना भरने के लिए कहा गया।
जांच में यह बात सामने आई कि धोखाधड़ी से हासिल की गई रकम हरनेक सिंह की ओर से चलाए जा रहे मनी-ट्रांसफर आउटलेट के जरिए मिली थी। इस काम में उसके साथ सह-आरोपी आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन भी शामिल थे। आरोपी हरनेक सिंह मई 2013 में भारत से भाग गया और बाद में गैर-कानूनी तरीके से अमेरिका चला गया, जहां वह एक दशक से अधिक समय तक फरार रहा।
जब हरनेक सिंह फरार चल रहा था, तब सह-आरोपी आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई उक्त अदालत में पूरी हुई और दोनों को 26 मई 2025 को दोषी ठहराया गया।
हालांकि, समन और वारंट के बावजूद हरनेक सिंह ट्रायल कोर्ट के सामने पेश नहीं हुआ। नतीजतन, पंचकूला में सीबीआई के स्पेशल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत ने 22 अप्रैल 2024 को उसके खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया। इसके बाद सीबीआई ने इंटरपोल के जरिए इस मामले को आगे बढ़ाया, जिसके नतीजे में आरोपी के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी हुआ और उसके पासपोर्ट के लिए लुक-आउट सर्कुलर भी जारी किया गया था।
--आईएएनएस
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