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बिहार: आपदा में त्वरित चिकित्सा सहायता की तैयारी परखी, एम्स पटना ने रोहतास के करमचट बांध पर किया लाइव मॉक ड्रिल

बिहार:

सासाराम, 23 अगस्त (आईएएनएस)। आपदा के दौरान त्वरित और प्रभावी चिकित्सा प्रतिक्रिया की क्षमता मजबूत करने के उद्देश्य से एम्स पटना ने रोहतास जिले के करमचट बांध, सासाराम में बहु-एजेंसी पूर्ण-स्तरीय लाइव मॉक ड्रिल का आयोजन किया।

इस अभ्यास में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), स्वास्थ्य आपातकालीन संचालन केंद्र, पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं, गैर सरकारी संगठनों के स्वयंसेवकों तथा एम्स पटना के चिकित्सकों और सहयोगी दलों ने भाग लिया। एम्स पटना से करीब 200 किलोमीटर दूर आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य आपदा तैयारी, आपातकालीन चिकित्सा प्रतिक्रिया, सामूहिक दुर्घटना प्रबंधन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को परखना था।

अभ्यास में बीएचआईएसएचएम क्यूब की त्वरित तैनाती और आपदा या सामूहिक दुर्घटना की स्थिति में उसकी कार्यक्षमता का प्रदर्शन किया गया। बीएचआईएसएचएम क्यूब एक पोर्टेबल आपातकालीन चिकित्सा केंद्र के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

इससे पहले, 24 जुलाई को एम्स पटना में टेबल-टॉप अभ्यास आयोजित किया गया था, जिसमें आपदा परिदृश्य, आवश्यक चिकित्सा प्रतिक्रिया व्यवस्था, घटना कमान प्रणाली और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय पर चर्चा की गई थी। इसके बाद पूर्ण-स्तरीय अभ्यास की तैयारी की गई।

करमचट बांध पर तैयार काल्पनिक आपदा परिदृश्य में 150 से अधिक लोगों के मनोरंजन और नौका विहार के लिए मौजूद होने की स्थिति दिखाई गई। काल्पनिक विस्फोट के बाद भगदड़ की स्थिति और करीब 70 सिमुलेटेड घायलों का परिदृश्य बनाया गया।

इसमें बच्चों, बुजुर्गों और घायलों को शामिल किया गया। घटना कमान, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन, ट्रायेज, मरीजों का स्थानांतरण, पुनर्जीवन, आपातकालीन चिकित्सा उपचार, तकनीकी बचाव, संसाधन प्रबंधन और संचार की प्रक्रिया को परखा गया।

अभ्यास का नेतृत्व ट्रॉमा सर्जरी एवं क्रिटिकल केयर विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार ने किया। एम्स पटना ने उन्हें घटना कमांडर के रूप में नियुक्त किया था।

घटना कमान दल में क्लिनिकल, संसाधन और सुरक्षा प्रमुख शामिल थे। चलने में सक्षम घायलों को ग्रीन जोन तथा तत्काल उपचार और पुनर्जीवन की जरूरत वाले घायलों को रेड जोन में भेजा गया। अभ्यास में 25 रेड जोन और 45 ग्रीन जोन घायलों का प्रबंधन किया गया।

बीएचआईएसएचएम क्यूब में उपलब्ध चिकित्सा उपकरणों, आपातकालीन सामग्री, जांच सुविधाओं और जीवनरक्षक प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया गया। इसमें न्यूरोसर्जिकल इलाज, छाती ट्यूब डालना, रक्तस्राव नियंत्रण, स्थिरीकरण, दर्द नियंत्रण और सूचरीकरण जैसी प्रक्रियाएं शामिल थीं। क्यूब की डिजिटल सूची और संसाधन-स्थान पहचान प्रणाली भी प्रदर्शित की गई। एनडीआरएफ टीम ने बांध के पानी में गिरे लोगों और लापता व्यक्तियों से संबंधित बचाव कार्य का प्रदर्शन किया।

अर्जुन फाउंडेशन के करीब 30 स्वयंसेवकों ने भी सिमुलेटेड घायलों और रोल-प्लेयर के रूप में भाग लिया। अभ्यास के बाद सभी एजेंसियों के प्रतिनिधियों के साथ डीब्रीफिंग सत्र आयोजित किया गया। इसमें कमियों, चुनौतियों और भविष्य के अभ्यासों में सुधार पर चर्चा हुई। एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने टीमों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान भविष्य में भी ऐसे अभ्यासों के जरिए आपदा तैयारी और सामूहिक दुर्घटनाओं से निपटने की क्षमता मजबूत करता रहेगा।

--आईएएनएस

एमएनपी/एएसएच