नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे, देश की वैश्विक भूमिका, उत्तर प्रदेश की राजनीति, वंदे मातरम को लेकर मचे घमासान और समान नागरिक संहिता समेत कई मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी।
सलमान खुर्शीद ने कहा कि भारत के लिए यह सम्मेलन वैश्विक मंच पर अपनी नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदारी प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर जरूर है। ब्रिक्स को सही परिप्रेक्ष्य में समझने की जरूरत है। भारत में सम्मेलन होना इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि यह पहली बार हो रहा है, बल्कि इसलिए महत्वपूर्ण है कि भारत के सामने वैश्विक स्तर पर बड़ी अपेक्षाएं हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के तनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रूस और भारत के संबंध अच्छे हैं। इसी तरह पश्चिम एशिया में इजरायल, ईरान, अमेरिका और अरब देशों के बीच जारी तनाव के बीच भी भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत को यह दिखाने का अवसर देती है कि वह वैश्विक समस्याओं के समाधान में किस तरह योगदान दे सकता है। सम्मेलन के खत्म होने के बाद यह आकलन होना चाहिए कि भारत ने वैश्विक नेतृत्व की अपनी जिम्मेदारी कितनी निभाई और आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे पर खुर्शीद ने कहा कि दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ने के बाद शीर्ष नेतृत्व की आमने-सामने मुलाकात महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच एससीओ के दौरान हुई बातचीत का भी उल्लेख किया। हालांकि, खुर्शीद ने भारत-चीन संबंधों को लेकर अपनी पार्टी द्वारा उठाए गए सवालों को दोहराते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध जिस तरह होने चाहिए, वैसे नहीं हैं। सरकार को चीन के साथ होने वाली बातचीत के बारे में देश को जानकारी देनी चाहिए। केवल औपचारिक मुलाकात, अभिवादन या दोस्ताना तस्वीर से संतुष्टि नहीं होगी। सरकार को यह बताना चाहिए कि बातचीत में वास्तविक मुद्दों पर क्या चर्चा हुई और भारत ने अपने हितों को किस तरह सामने रखा।
क्या भारत एक बड़ी वैश्विक ताकत बनकर उभरा है? इस सवाल पर खुर्शीद ने कहा कि भारत आज अचानक वैश्विक शक्ति नहीं बना है। उन्होंने गुटनिरपेक्ष आंदोलन के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी भारत ने विकासशील और ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज को नेतृत्व दिया था। मौजूदा परिस्थितियों में भारत के पास वैश्विक स्तर पर और आगे बढ़ने का अवसर है, लेकिन ताकत और प्रभाव बढ़ने के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ती है। केवल 'हाई टेबल' तक पहुंचना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां पहुंचकर अपनी जिम्मेदारी निभाना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुरानी मस्जिद को गिराए जाने के सवाल पर खुर्शीद ने सीधे निष्कर्ष देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उनके पास मामले से जुड़े सभी दस्तावेज नहीं हैं और मामला अदालत में है। स्थानीय लोगों का दावा है कि उनके पास इससे संबंधित दस्तावेज और सबूत हैं, जिन्हें वे हाई कोर्ट के सामने रखेंगे। लंबे समय से मौजूद किसी धार्मिक स्थल के संबंध में अचानक कार्रवाई होने पर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पहले संबंधित पक्षों को नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के बारे में क्या जानकारी दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई होनी चाहिए और पूरे मामले पर स्पष्ट चर्चा तभी संभव है, जब सभी तथ्य सामने हों।
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ संभावित गठबंधन पर खुर्शीद ने कहा कि पार्टी इस विषय पर विचार कर रही है और कुछ संकेत भी दिए गए हैं। यदि पार्टी उनसे सलाह या सुझाव मांगेगी तो वह अपनी राय देंगे, लेकिन अंतिम निर्णय पार्टी का होगा और उसे सभी स्वीकार करेंगे। कांग्रेस का प्रयास अन्य सेक्युलर पार्टियों को साथ लेकर संगठन को मजबूत करने का होगा। गठबंधन को मजबूत करने के लिए सभी दलों को मिलकर काम करना जरूरी है।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को मजबूत मुस्लिम नेतृत्व की जरूरत के सवाल पर खुर्शीद ने कहा कि नेतृत्व को केवल किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दलित, पिछड़े, अगड़े और समाज के अन्य वर्गों का भी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की बात कही। कांग्रेस की कोशिश उन वर्गों को फिर से जोड़ने की है जो कभी पार्टी के साथ थे लेकिन बाद में दूर हो गए, साथ ही उन सामाजिक समूहों को भी साथ लाने की है जो लंबे समय से कांग्रेस के साथ नहीं रहे हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी इसी दिशा में प्रयास कर रही है।
वंदे मातरम को लेकर चल रहे विवाद पर खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति का फैसला सामने है और पार्टी के निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए। पूरे वंदे मातरम का सम्मान है, लेकिन पार्टी ने जो परंपरागत रूप से अपनाया है और जिस तरीके से निर्णय लिया है, वह उसके अनुरूप है। इस मुद्दे पर अलग-अलग नेताओं की व्यक्तिगत राय को विवाद का विषय बनाने के बजाय पार्टी के आधिकारिक निर्णय को देखा जाना चाहिए।
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता के तहत विवाह संबंधी प्रावधानों पर सवाल पूछे जाने पर खुर्शीद ने कहा कि संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में समान नागरिक संहिता का उल्लेख है, लेकिन नीति-निर्देशक तत्व मौलिक अधिकारों को खत्म नहीं कर सकते। प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म और धार्मिक आस्था के अनुसार जीवन जीने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। ऐसे में यूसीसी और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन का अंतिम निर्धारण अदालतों को करना होगा।
--आईएएनएस
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