राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद : परमहंस आचार्य ने कहा, 'दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन निर्दोषों को न फंसाया जाए'

राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद : परमहंस आचार्य ने कहा, 'दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन निर्दोषों को न फंसाया जाए'

अयोध्या, 20 जुलाई (आईएएनएस)। श्रीराम मंदिर चंदे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर संसद और सुप्रीम कोर्ट में चल रही चर्चाओं के बीच अयोध्या के तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष ने जांच की मांग उठाई है तो प्रधानमंत्री को उस पर विचार करना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, लेकिन किसी भी निर्दोष व्यक्ति को व्यक्तिगत कारणों या दुर्भावना के चलते निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

संसद में विपक्ष द्वारा राम मंदिर चंदे की कथित चोरी का मुद्दा उठाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए परमहंस आचार्य ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "इस मामले में पहले से ही कार्रवाई चल रही है। विपक्ष स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है, तो केंद्र सरकार को भी उस पर विचार करना चाहिए। हालांकि, जिस पार्टी ने पहले भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे, उसे राम मंदिर से जुड़े मामलों पर बोलने से पहले अपने पुराने रुख का जवाब देना चाहिए। यदि जांच की मांग की जा रही है, तो मैं स्वयं भी प्रधानमंत्री से इस पर गंभीरता से विचार करने का अनुरोध करता हूं।"

22 जुलाई को प्रस्तावित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक को महत्वपूर्ण बताते हुए परमहंस आचार्य ने कहा, "पूरे देश की नजर बैठक पर है। ट्रस्ट से जुड़े विवादों में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी दोषी को बख्शा न जाए, लेकिन व्यक्तिगत दुश्मनी, मतभेद या अन्य कारणों से निर्दोष लोगों को फंसाने की कोशिश भी नहीं होनी चाहिए। जिन लोगों पर लगाए गए आरोप साबित नहीं होते, उन्हें पूरे सम्मान के साथ अपने दायित्व निभाने का अवसर मिलना चाहिए, जबकि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।"

इस दौरान परमहंस आचार्य ने सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के हालिया बयान पर कहा, "वह एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, और यदि उन्होंने केवल प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपनी चिंताएं व्यक्त की होतीं, तो सरकार निश्चित रूप से उन पर विचार करती। हालांकि, वांगचुक के विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने देश-विरोधी नारे लगाए, भगवान श्रीराम और माता सीता का अपमान किया, आरएसएस के सदस्यों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं, और देश को बांटने जैसी बातें कहीं। किसी भी आंदोलन में ऐसे तत्वों को जगह नहीं मिलनी चाहिए और आंदोलन केवल मूल मुद्दों तक सीमित रहना चाहिए।"

वंदे मातरम बिल को लेकर भी परमहंस आचार्य ने समर्थन जताया। उन्होंने कहा, "यदि कोई भारतीय अपने देश से प्रेम करता है तो उसके लिए इस तरह का विधेयक खुशी की बात है। देशभक्ति की भावना को मजबूत करने वाले हर कदम का स्वागत किया जाना चाहिए।"

राम मंदिर से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर हनुमानगढ़ी के महंत धर्म दास महाराज ने कहा, "जो भी पक्ष अदालत गया है, वह न्याय की उम्मीद से गया है। मामला सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है, इसलिए न्यायिक प्रक्रिया पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट निष्पक्ष निर्णय देगा। यदि मुझे लगेगा कि सभी पहलुओं पर न्याय नहीं हुआ है तो मैं भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाउंगा। राम जन्मभूमि के प्रबंधन और अयोध्या में संत समाज की भूमिका जैसे मुद्दों को भी आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।"

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम