नई दिल्ली, 2 सितंबर (आईएएनएस)। अयोध्या में राम मंदिर के प्रबंधन को और अधिक पेशेवर और पारदर्शी बनाने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा पहले पूर्णकालिक सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसे लेकर बुधवार को ट्रस्ट की एक अहम बैठक भी चल रही है, जिसके बाद राम मंदिर के पहले सीईओ के नाम की घोषणा हो सकती है। इस बीच राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
इस मुद्दे पर भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है, जिसे न्यायालय के फैसले के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत बनाया गया था। उनके कामकाज के लिए उनका अपना संविधान है, इसलिए वे उसका पालन करते हुए जो भी कानूनी रूप से सही फैसला लेंगे, मेरा मानना है कि वह धार्मिक भावनाओं का पूरा सम्मान करेगा। यह उनका अपना फैसला होगा और किसी भी अन्य व्यक्ति को इस पर किसी भी तरह से टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।"
दिनेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर आस्था का केंद्र है और ट्रस्ट का हर निर्णय भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। बाहरी लोगों को इस पर अनावश्यक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
वहीं, पटना में बिहार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने भी राम मंदिर में पारदर्शिता की बात पर जोर दिया। राम मंदिर के पहले सीईओ की नियुक्ति पर उन्होंने कहा, "राम मंदिर को लेकर सरकार का स्पष्ट रुख है कि वहां किसी भी हाल में कोई अनियमितता नहीं होनी चाहिए। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में भी बहुत तेजी से कार्रवाई की गई और अब सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है।"
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने इस नियुक्ति पर सवाल खड़े किए हैं। लखनऊ में कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने चढ़ावा चोरी मामले का जिक्र करते हुए ट्रस्ट पर हमला बोलते हुए कहा, "ट्रस्ट ने लोगों के भरोसे को तोड़ा है। जिस ट्रस्ट ने भगवान राम के भक्तों का भरोसा खो दिया है और जहां भगवान राम के लिए दिए गए दान और चढ़ावे की चोरी के आरोप सामने आए हैं, वह अब सीईओ नियुक्त कर रहा है। यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।"
--आईएएनएस
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