गुजरात: बिरसा मुंडा ट्राइबल यूनिवर्सिटी के पहले दीक्षांत समारोह में 667 छात्रों को मिलीं डिग्रियां

बिरसा मुंडा आदिवासी विश्वविद्यालय का पहला दीक्षांत समारोह संपन्न
गुजरात:

राजपीपला, 20 सितंबर (आईएएनएस)। राजपीपला में बिरसा मुंडा ट्राइबल यूनिवर्सिटी का पहला दीक्षांत समारोह रविवार को आयोजित किया गया। इस समारोह में 667 छात्रों को डिग्रियां दी गईं और 47 ग्रेजुएट्स को गोल्ड और सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया। समारोह में गुजरात के गवर्नर और यूनिवर्सिटी के चांसलर आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल शामिल हुए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से नर्मदा जिले में स्थापित इस यूनिवर्सिटी ने आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस समेत विभिन्न फैकल्टी के छात्रों को डिग्रियां प्रदान कीं।

समारोह के दौरान ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन और एमएसडब्ल्यू प्रोग्राम के ग्रेजुएट्स को उनकी डिग्रियां दी गईं।

कार्यक्रम की शुरुआत में देवव्रत ने औपचारिक रूप से दीक्षांत समारोह की शुरुआत की, जिसके बाद दीक्षांत शपथ दिलाई गई।

बाद में गवर्नर और अन्य अधिकारियों ने चुने हुए छात्रों को मेडल और डिग्रियां प्रदान कीं।

पटेल ने इस मौके को यूनिवर्सिटी के पहले दीक्षांत समारोह से कहीं बढ़कर बताया और इसे आदिवासी युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों के विस्तार से जोड़ा।

पटेल ने कहा कि यह सिर्फ पहला दीक्षांत समारोह नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित 'आदिवासी युवा बदलाव' का पहला जश्न भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 25 साल पहले, इस इलाके में ग्रेजुएशन-लेवल की पढ़ाई के लिए सिर्फ एक कॉलेज था, जिससे छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए सूरत और वड़ोदरा जैसे शहरों में जाना पड़ता था।

उन्होंने कहा कि तब से आदिवासी इलाकों में हायर एजुकेशन के मौके बढ़े हैं और वहां पांच इंजीनियरिंग कॉलेज, छह पॉलिटेक्निक और 11 मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा आदिवासी यूनिवर्सिटी और गोविंद गुरु यूनिवर्सिटी ने आदिवासी समुदायों के लिए हायर एजुकेशन की सुविधाएं आसान बनाने में मदद की है।

उन्होंने ग्रेजुएट होने वाले छात्रों से अपील की कि वे आधुनिक शिक्षा हासिल करते हुए भी अपनी जड़ों, संस्कृति और जमीन से जुड़े रहें।

उन्होंने युवाओं से कहा कि वे सिर्फ सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने वाले न बनें, बल्कि देश के विकास में भागीदार बनें और अपना करियर बनाते हुए अपने ज्ञान और हुनर ​​का इस्तेमाल स्थानीय विकास के लिए करें।

मुख्यमंत्री ने उनसे यह भी कहा कि वे 'विकसित भारत' के संकल्प के तहत 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ एक विकसित गुजरात बनाने में मदद करें।

जनजातीय विकास मंत्री नरेश पटेल ने जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार के लिए सरकार की पहलों पर प्रकाश डाला, जिनमें वनबंधु कल्याण योजना, शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवानी महोत्सव शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि छात्रवृत्तियों और अन्य सरकारी योजनाओं ने जनजातीय समुदायों के छात्रों के लिए चिकित्सा, इंजीनियरिंग और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसरों को व्यापक बनाया है।

--आईएएनएस

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