जयपुर, 22 अगस्त (आईएएनएस)। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने वर्ष 2016 के कथित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन टेंडर घोटाले मामले में करीब 5,000 पन्नों की एक पूरक चार्जशीट एसीबी कोर्ट-1 में दाखिल की है।
इस चार्जशीट में तत्कालीन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक और आईएएस अधिकारी नीरज के. पवन समेत पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है।
चार्जशीट दाखिल होने के तुरंत बाद लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी सुनील राठौड़ ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। एसीबी के विशेष लोक अभियोजक बीएस चौहान ने बताया कि एक अन्य आरोपी सुरेंद्र सिंह के खिलाफ जांच अभी भी जारी है।
यह मामला स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए शुरू की गई आरोग्य रथ योजना में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
जांच के अनुसार, वर्ष 2016 में जिन आरोग्य रथों के संचालन का दावा किया गया था, वे ज्यादातर केवल कागजों में ही मौजूद थे। आरोप है कि भुगतान प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
कथित घोटाले की रकम 1 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।
घटना के समय नीरज के. पवन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक थे। वर्ष 2021 में अदालत ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी थी। एसीबी ने मई 2016 में वरिष्ठ अधिकारियों के घरों और कार्यालयों समेत 18 स्थानों पर छापेमारी की थी।
मामले में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें नीरज के. पवन, लेखाकार जोजी वर्गीज, सहायक लेखा अधिकारी दीपा गुप्ता और कथित बिचौलिए अजीत सोनी तथा सुनील राठौड़ शामिल हैं।
जांच में आरोप है कि आरोग्य रथ परियोजना का मुख्य ठेका सुरेंद्र सिंह की कंपनी सुरेंद्र इलेक्ट्रोटेक को दिया गया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भुगतान लिया गया और ठेकेदार कंपनियों से 17 प्रतिशत कमीशन वसूला गया।
आरोपों के मुताबिक, इसमें टेंडर दिलाने के लिए 5 प्रतिशत रिश्वत और बिल पास करवाने के लिए 12 प्रतिशत राशि ली जाती थी।
एसीबी की यह पूरक चार्जशीट अब अदालत के सामने है, जबकि सुरेंद्र सिंह की भूमिका की जांच अभी जारी है।
--आईएएनएस
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