जयपुर, 21 जुलाई (आईएएनएस)। राजस्थान के साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और सरकारी राशि को सुरक्षित रखने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, मंगलवार को सरकारी सचिवालय में स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी की साइबर को-ऑर्डिनेशन पर एक विशेष बैठक हुई।
साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड को रोकने के लिए एक ठोस और नतीजे देने वाली रणनीति बनाने के लिए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा, राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधियों ने बैठक में हिस्सा लिया।
मुख्य सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि बैंकों को 1930 साइबर हेल्पलाइन के जरिए शिकायतें मिलने पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि नागरिक की शिकायत और धोखाधड़ी वाले खातों को फ्रीज करने के बीच का समय लगभग शून्य हो जाए।
उन्होंने चिंता जताई कि अभी दस में से सिर्फ एक मामले में ही बैंक की समय पर दखल से धोखाधड़ी का पैसा ब्लॉक हो पाता है। उन्होंने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे व्यक्तिगत रूप से 1930 साइबर कॉल सेंटर जाकर नागरिकों की शिकायतों को खुद समझें और पुलिस के साथ कामकाज में तालमेल बेहतर करें।
उन्होंने भरोसा जताया कि बैंकों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की मिली-जुली और समयबद्ध कोशिश से साइबर फाइनेंशियल अपराधों पर काफी हद तक रोक लगेगी और राजस्थान डिजिटल सुरक्षा के मामले में एक मॉडल राज्य बनेगा।
डीजीपी ने जोर दिया कि साइबर सुरक्षा और 'म्यूल अकाउंट्स' को रोकने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइडलाइंस को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। संदिग्ध खातों और पहचान की गई हॉटस्पॉट बैंक शाखाओं के लिए एक सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग सिस्टम, साथ ही जिला स्तर पर नियमित समन्वय बैठकें, जवाबदेही बढ़ाएंगी और बैंकों व साइबर पुलिस के बीच तालमेल बेहतर करेंगी।
उन्होंने दोहराया कि राजस्थान पुलिस साइबर अपराध के प्रति राज्य सरकार की 'जीरो-टॉलरेंस' नीति पहल को प्रभावी ढंग से लागू करने और नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी से बचाने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मुख्य सचिव ने बताया कि सभी बैंकों के प्रतिनिधि बुधवार को पुलिस मुख्यालय स्थित 1930 साइबर कॉल सेंटर का दौरा करेंगे। इस दौरे से बैंक अधिकारी यह समझ सकेंगे कि कॉल सेंटर कैसे काम करता है, शिकायत निवारण की प्रक्रिया क्या है और साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों को संभालने में क्या चुनौतियां आती हैं, जिससे भविष्य के मामलों में तेजी से और ज्दाया प्रभावी कार्रवाई हो सकेगी।
उन्होंने देखा कि साइबर अपराधी अक्सर केवाईसी अपडेट के बहाने फेक कॉल, एसएमएस मैसेज और धोखाधड़ी वाले लिंक के जरिए ग्राहकों को ठगते हैं। उन्होंने बैंकों को निर्देश दिया कि वे केवाईसी से जुड़ी जानकारी केवल वेरिफाइड और आधिकारिक चैनलों के जरिए ही दें।
साइबर धोखाधड़ी के प्रति वरिष्ठ नागरिकों की कमजोरी को देखते हुए, उन्होंने बैंकों को निर्देश दिया कि वे शाखाओं में खास सहायता काउंटर बनाएं और बुजुर्ग ग्राहकों को सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग तरीकों के बारे में शिक्षित करने के लिए व्यक्तिगत जागरूकता पहल करें। बैठक में यह तय किया गया कि बैंक के सीनियर अधिकारी और नोडल प्रतिनिधि अकाउंट फ्रीज करने की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए नियमित रूप से 1930 साइबर कंट्रोल रूम का दौरा करेंगे।
--आईएएनएस
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