पटना, 8 जून (आईएएनएस)। बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करने का सोमवार को आखिरी दिन है। इस बीच, 10 सीटों पर होने वाले इस चुनाव के लिए एनडीए के घटक दलों ने 9 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इस बीच, कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय जनता दल ने सुनील सिंह को एक बार फिर विधान परिषद भेजने को लेकर हरी झंडी दे दी है।
उधर, इस निर्णय की खबर सामने आने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव की बेटी और सारण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुकीं रोहिणी आचार्या ने मोर्चा खोल दिया है।
उन्होंने सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स के जरिए इस निर्णय का विरोध जताते हुए कहा कि पार्टी की स्थापना के समय से लेकर आज तक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े एक नहीं अनेकों समर्पित, सम्मानित, जमीन से जुड़े कट्टर लालूवादी अल्पसंख्यक चेहरे हैं। यादव, दलित, पिछड़े और वंचित समाज से आने वाले वरिष्ठ और युवा लोग हैं। ऐसे लोगों की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय है और पार्टी हित में तो कतई नहीं है।
उन्होंने प्रश्न उठाते हुए आगे लिखा कि गुटबाजी, भितरघात, विश्वासघात, मक्कारी जिसकी फितरत, विरोधियों से जिसकी मिलीभगत, नजदीकियों की बात बताकर उगाही, वसूली करना जिसका धंधा, जो अपनी झूठी धौंस जताने के लिए पार्टी कार्यालय में पार्टी के कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों को सामने बैठाकर बहन-बेटियों के बारे में ओछी, अमर्यादित बातें करता है, उसको कैसे 'उसके' ही द्वारा उम्मीदवार बना दिया गया।
रोहिणी आचार्या ने लिखा, "जिसे सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे ले जाने, पार्टी की बेहतरी की जिम्मेदारी लालू यादव ने सौंपी? समर्पित-निष्ठावान कार्यकर्ताओं-नेताओं का टोंटा पड़ गया क्या? ऐसे ही लोगों की वजह से वर्षों से मजबूती के साथ खड़े कार्यकर्ताओं-समर्थकों में विक्षोभ-असंतोष भी है और बीते वर्ष के नवंबर में ऐसे ही लोगों की वजह से हुआ नुकसान भी दिख चुका है।"