जयपुर, 18 जून (आईएएनएस)। राजस्थान की राजनीति में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कोटा में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के कार्यक्रम के बाद राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने उन पर निशाना साधते हुए कांग्रेस के शासनकाल को कटघरे में खड़ा किया।
जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान दीया कुमारी ने कहा कि विपक्ष में रहते हुए राहुल गांधी जो कर रहे हैं, वह उनसे अपेक्षित है और वह आगे भी ऐसा करते रहेंगे। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी, तब लगातार हुए पेपर लीक मामलों पर राहुल गांधी ने कभी कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी।
दीया कुमारी ने कहा, "राजस्थान में कांग्रेस सरकार के दौरान जितने पेपर लीक हुए, वह अपने आप में एक रिकॉर्ड था। मैं राहुल गांधी से पूछना चाहती हूं कि उस समय उन्होंने क्या कहा था? वे पूरी तरह मौन थे। पांच साल तक लगातार पेपर लीक होते रहे, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब आपकी सरकार थी, तब यह सब क्यों होता रहा?"
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने परीक्षाओं को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए बेहतर तैयारियां की हैं। आने वाले समय में परीक्षाएं बेहतर तरीके से आयोजित होंगी और ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।
दरअसल, बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कोटा के दशहरा मैदान में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में छात्रों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम राजनीति के लिए नहीं, बल्कि छात्रों की चिंताओं, चुनौतियों और उनके भविष्य पर चर्चा के लिए आयोजित किया गया है।
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने आकांक्षा नाम की एक छात्रा द्वारा कथित रूप से लिखे गए सुसाइड नोट का जिक्र करते हुए कहा कि यह किसी छात्र की व्यक्तिगत विफलता नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था की विफलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली धीरे-धीरे आर्थिक शोषण का माध्यम बनती जा रही है।
राहुल गांधी ने नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि लाखों छात्र इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं, लेकिन बहुत कम छात्रों का चयन हो पाता है।
उन्होंने कहा, "माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई और कोचिंग पर लाखों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन हमारी शिक्षा व्यवस्था चयन से ज्यादा अस्वीकृति की व्यवस्था बन गई है। यह छात्रों को अपमानित करती है और कई युवाओं को अवसाद की ओर धकेल देती है।"