लखनऊ, 31 अगस्त (आईएएनएस)। पूरे पूर्वांचल समेत उत्तर प्रदेश में सोमवार को कजरी तीज बहुत ही उत्साह, विश्वास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। कजरी तीज को लेकर खास करके काशी की महिलाओं में अलग उत्साह और खुशी देखने को मिला।
कजरी तीज को लेकर महिलाओं ने एक रात पहले रतजगा किया और जलेबा खाया। इसी के साथ लोकगीत भी गाया गया। कजरी तीज के शुभ दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और पति की लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं। पूर्वांचल की लोक परंपराओं और लोक कथाओं को बढ़ावा देने और नई पीढ़ी को इन रीति-रिवाजों और परंपराओं को समझाने के लिए कजरी तीज का उत्सव मनाया जाता है।
इसी को लेकर आईएएनएस से बात करते हुए स्वर्णिमा शर्मा ने बताया कि कजरी तीज हमारे पूर्वांचल और बिहारियों का एक त्योहार है। इस त्योहार में लोक गीत और परंपराओं को दिखाया जाता है। इसमें ग्रामीण जीवन शैली को गीतों के माध्यम से दिखाया जाता है। उसका सुंदर चित्रण किया जाता है। इस पर्व को मनाने के लिए महिलाएं सोलह श्रृंगार करके सजती हैं। इस पर्व को लेकर महिलाएं हाथों में मेहंदी लगाती हैं और रातभर गाने-बजाने का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि कजरी तीज का त्योहार हमारी नई पीढ़ी को परंपराओं के साथ जोड़ने का एक साधन है, जिससे उन्हें यह पता चले कि किस प्रकार से हमारी सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखना है और रीति-रिवाज को आगे बढ़ाना है। उन्होंने गणेश चतुर्थी के बारे में बात करते हुए बताया कि यह मुख्य रूप से माताओं द्वारा अपने बच्चे, खासकर बेटों की लंबी आयु, अच्छा स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए मनाया जाता है। वहीं, जिन माताओं के पास बेटा नहीं है, वे भी गणेश जी की पूजा करके उनसे पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती हैं। उनसे आशीर्वाद मांगती हैं। गणेश चतुर्थी का व्रत पूर्ण रूप से निर्जला होता है। इसमें शाम को पूजा करने के बाद पानी पीकर व्रत खोला जाता है।
श्वेता शर्मा ने कहा कि कजरी तीज का हम महिलाओं के लिए बहुत महत्व है। इस दिन महिलाएं सजधज कर त्योहार मनाती हैं। यह पर्व पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए मनाया जाता है। इसमें महिलाएं समूह में गाने-बजाने का कार्यक्रम करती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए तीज के साथ-साथ गणेश चतुर्थी का व्रत बहुत मायने रखता है, क्योंकि तीज पति के लिए तो गणेश चतुर्थी पुत्र के लिए रखा जाता है।
--आईएएनएस
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