पश्चिम बंगाल में मदरसों के सर्वे पर सियासत, राजीव राय और मौलाना रशीदी ने उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल में मदरसों के सर्वे पर सियासत, राजीव राय और मौलाना रशीदी ने उठाए सवाल

दिल्ली, 7 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मदरसों का सर्वेक्षण करने के निर्देश पर समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय और अखिल भारतीय इमाम संघ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने प्रतिक्रिया दी है।

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मदरसों का सर्वेक्षण करने के निर्देश पर सपा सांसद राजीव राय ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "जब वे (मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी) टीएमसी में थे, तब उन्होंने यह सर्वेक्षण क्यों नहीं कराया? ये लोग अवसरवादी हैं। इनके पास न तो कोई दूरदृष्टि है और न ही कोई विचारधारा। सत्ता की कुर्सी ही इनके लिए सब कुछ है।"

खान सर से जुड़े विवाद पर समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने आईएएनएस कहा, "खान सर, 'खान' हैं। चाहे जो भी हो, निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यह छात्रों के भविष्य का भी सवाल है। इसे भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।" एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने पर संजीव राय ने कहा, "विपक्ष में रहते हुए राजनाथ सिंह और स्मृति ईरानी सिलेंडर लेकर सड़क पर बैठ जाते थे, अब सभी चुप हैं। ये (भाजपा) दोहरे चरित्र वाली सरकार है।"

अखिल भारतीय इमाम संघ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, "पश्चिम बंगाल में कुल 614 मदरसे हैं जिन्हें सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जाता है। सरकार उन्हें अनुदान प्रदान करती है, शिक्षकों की व्यवस्था करती है, बुनियादी ढांचे की देखरेख करती है और शिक्षा प्रणाली की निगरानी भी करती है। सरकार का इन मदरसों पर अधिकार और नियंत्रण है। इसके अलावा हजारों मदरसे हैं, जिनका कोई सरकारी रिकार्ड नहीं है।"

साजिद रशीदी ने आगे कहा, "सर्वे का आदेश सरकार उन्हीं मदरसों को दे सकती है, जिनको फंड दे रही है। अन्य मदरसों के लिए सिर्फ रजिस्ट्रेशन कराने का निर्देश सरकार जारी कर सकती है। दो प्रकार के मदरसे संचालित हैं, एक सरकारी और दूसरा जकात पर चलने वाला है। मुस्लिम समुदाय के 2.5 फीसदी जकात पर चलने वाले मदरसे पर सरकार हस्तक्षेप नहीं कर सकती। सरकार द्वारा वित्त पोषित मदरसों में बदलाव सरकार बदलाव कर सकती है। सरकार जकात से चलने वाले मदरसों से दूर रहे तो अच्छा है।"

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की सरकार ने मदरसों के कामकाज, बुनियादी ढांचे और उनकी कानूनी स्थिति की जांच के लिए व्यापक सर्वेक्षण का आदेश दिया है। अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग द्वारा पांच जून को आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे पांच जुलाई तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपें। अधिसूचना के मुताबिक, जिला प्रशासनों को मदरसों के स्थान, स्थापना का वर्ष, पंजीकरण का विवरण और वैध दस्तावेजों की उपलब्धता पर डाटा एकत्रित करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा छात्रों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की संख्या का विवरण भी मांगा गया है।

--आईएएनएस

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