मुंबई, 8 सितंबर (आईएएनएस)। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की अष्टमी के दिन शराब और मांसाहार पर रोक, इलाहाबाद हाई कोर्ट के कानून की सर्वोच्चता संबंधी रुख और उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण पर हुई कार्रवाई को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अष्टमी पर शराबबंदी का स्वागत करते हुए कहा कि यह हिंदू समाज की मान्यताओं से जुड़ा विषय है। वहीं, उन्होंने कहा कि देश में संविधान और कानून सभी व्यक्तियों से ऊपर हैं।
पश्चिम बंगाल में अष्टमी के दिन शराब और मांसाहार पर रोक को लेकर श्रीराज नायर ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद सरकार के इस कदम का स्वागत करती है। उन्होंने इसे हिंदू समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग बताया। नायर ने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में दुर्गा पूजा जैसे हिंदू धार्मिक उत्सवों को उनके धार्मिक स्वरूप से अलग कर मनोरंजन तक सीमित करने की कोशिश हुई। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और उससे पहले वामपंथी सरकारों पर हिंदू मान्यताओं और साधु-संतों का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने धार्मिक मान्यताओं और पूजा-पद्धतियों के सम्मान की दिशा में कदम उठाए हैं।
नायर ने यह भी कहा कि शराब के लिए पहले से कई ड्राई डे लागू होते हैं और अष्टमी के दिन एक दिन की रोक से किसी को बड़ी परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सरकार के इस फैसले को उचित बताते हुए समर्थन किया।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस रुख का भी नायर ने स्वागत किया कि कोई व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में कानून सर्वोच्च है और हर नागरिक को उसका पालन करना चाहिए। नायर ने कहा कि कुछ लोग संविधान और कानून की बात तो करते हैं, लेकिन व्यवहार में उसका पालन नहीं करते। उन्होंने धार्मिक नेताओं पर शरिया को लेकर जोर देने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश का संविधान और कानून ही सर्वोपरि हैं। संविधान की प्रति दिखाना या उसकी तस्वीर लेकर सामने आना पर्याप्त नहीं है, बल्कि संविधान के प्रावधानों का पालन करना जरूरी है। नायर ने हाई कोर्ट द्वारा संबंधित याचिका खारिज किए जाने का भी स्वागत किया और कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था के खिलाफ भीड़ के जरिए दबाव बनाने की कोशिशों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों और बढ़ती राजनीतिक सरगर्मियों के बीच नायर ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने सपा पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी के पुराने शासन को लेकर भी इस तरह के आरोप लगते रहे हैं। नायर ने इकरा हसन का नाम लेते हुए भी राजनीतिक तुष्टीकरण से जुड़े आरोप लगाए। उन्होंने सपा के पुराने शासनकाल पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए और कहा कि अवैध गतिविधियों से जुड़े लोगों को राजनीतिक संरक्षण मिलने की शिकायतें रही हैं।
उत्तर प्रदेश में मस्जिद के खिलाफ हुई कार्रवाई पर वीएचपी प्रवक्ता ने कहा कि प्रशासन ने अपने अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को कार्रवाई पर आपत्ति है तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। अवैध निर्माण के खिलाफ अन्य राज्यों में भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वीएचपी इस कार्रवाई का समर्थन करती है। इस दौरान नायर ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से शुरू की गई पड़ताल का भी स्वागत किया। उन्होंने दावा किया कि इतिहास में कई मंदिरों को तोड़े जाने और उनके स्थान पर अन्य धार्मिक संरचनाएं बनाए जाने की घटनाएं हुई हैं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा मामले में प्रशासन ने अपनी योजना के तहत कार्रवाई की और यह वीएचपी की मांग के कारण नहीं हुई। खुदाई के दौरान कुएं से कथित तौर पर प्राचीन चित्र और हिंदू अवशेष मिलने की बात सामने आई है। उन्होंने मांग की कि एएसआई को पूरी स्वतंत्रता के साथ वैज्ञानिक तरीके से जांच करनी चाहिए। जांच के बाद जो तथ्य सामने आएं, उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पुरातात्विक दावों का अंतिम निष्कर्ष वैज्ञानिक जांच और संबंधित संस्थाओं की रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आना चाहिए।
--आईएएनएस
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