कोलकाता, 7 सितंबर (आईएएनएस)। बाल विवाह और किशोरावस्था में गर्भधारण पर रोक लगाने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने सख्त कदम उठाने की घोषणा की है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि यदि कोई लड़की 18 वर्ष की आयु पूरी करने से पहले मां बनती है तो उसके पति के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। ऐसे मामलों में राज्य सरकार स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगी।
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा, "पश्चिम बंगाल अब बाल विवाह और 18 वर्ष से कम आयु में मातृत्व के मामलों के लिए बदनाम हो गया है। इसके लिए पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार जिम्मेदार है, इसलिए अब 18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों के गर्भवती होने पर उनके पतियों के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ऐसे मामलों में स्वतः एफआईआर दर्ज करेगी। दोषी को अधिकतम 20 साल तक की सजा हो सकती है। साथ ही उसे सरकारी योजनाओं और सामाजिक कल्याण लाभों से भी वंचित किया जाएगा।"
उन्होंने कहा कि नाबालिग लड़के-लड़कियों का विवाह कराने वाले पुजारी या काजी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा संबंधित अभिभावकों को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 जनवरी 2016 से 30 जून 2026 के बीच राज्य में 18 वर्ष से कम आयु की करीब 60,000 लड़कियां मां बनीं। इस मामले में मुर्शिदाबाद जिला सबसे ऊपर है, जहां इस अवधि में 12,847 नाबालिग लड़कियां मां बनीं। इसके बाद दक्षिण 24 परगना जिले का स्थान है, जहां 4,178 लड़कियां 18 वर्ष की आयु से पहले मां बनीं। उन्होंने कहा कि यह जानकारी उन्हें राज्य स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा, "भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 में बाल विवाह रोकने के प्रावधान हैं। बाल विवाह के मामले इतने अधिक हैं कि सभी दोषियों को रखने के लिए राज्य में पर्याप्त जेलें भी नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद हम इसे जारी नहीं रहने देंगे। गिरफ्तारियां होंगी। हमें इस सामाजिक बुराई को खत्म करना है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बड़ा अभियान चलाया जाएगा।"
उन्होंने कहा कि सरकार बाल विवाह और कम उम्र में मातृत्व की रोकथाम के लिए जागरूकता और कानूनी कार्रवाई दोनों स्तरों पर अभियान तेज करेगी।
--आईएएनएस
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