कोलकाता, 21 जुलाई (आईएएनएस)। कोलकाता पुलिस अपराधियों की तलाश को और मजबूत करने के लिए देश के ‘क्रि-मैक’ (क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर) नेटवर्क से जुड़ गई है। इससे पुलिस के लिए अपराधियों का पता लगाना आसान हो जाएगा, भले ही वे भारत के किसी दूसरे हिस्से में भाग जाएं। कोलकाता पुलिस के हेडक्वार्टर, लालबाजार ने अधिकारियों को इस नेटवर्क से जुड़ने का निर्देश दिया है।
क्रि-मैक गृह मंत्रालय द्वारा 2020 में अपराध और अपराधियों का डेटा साझा करने के लिए शुरू किया गया एक सुरक्षित, वेब-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा प्रबंधित किया जाने वाला यह प्लेटफॉर्म देश भर की कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच रियल-टाइम, 24x7 जानकारी साझा करने के लिए एक सेंट्रल हब के तौर पर काम करता है।
अधिकारी के मुताबिक, पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसियां क्रि-मैक के जरिए अपराधों और अपराधियों के बारे में जानकारी का आदान-प्रदान करती हैं। अक्सर, राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच कम्युनिकेशन गैप (बातचीत में कमी) होता है। इसे दूर करने के लिए कोलकाता पुलिस के अधिकारियों से इस नेटवर्क का नियमित रूप से इस्तेमाल करने को कहा गया है।
लालबाजार की ओर से डिप्टी कमिश्नरों और पुलिस स्टेशन के अधिकारियों को आईसीजेएस (इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम) क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करके लॉग इन करने का निर्देश दिया गया है। उन्हें दिन में कम से कम एक बार, या जरूरत पड़ने पर उससे ज्यादा बार क्रि-मैक पोर्टल को एक्सेस करना होगा। यह पोर्टल अधिकारियों को कई लोगों को मैसेज भेजने और ‘सर्च ऑप्शन’ का इस्तेमाल करके जानकारी हासिल करने की सुविधा देता है।
लालबाजार ने हर पुलिस स्टेशन के अधिकारी को पोर्टल का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है। इसके जरिए कोलकाता पुलिस जरूरत पड़ने पर देश के किसी भी पुलिस स्टेशन के अधिकारियों से संपर्क कर सकती है, जिससे उन्हें बड़े मामलों की जांच से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने में मदद मिलेगी।
यह सिस्टम अंतर-राज्यीय अपराधियों को गिरफ्तार करने और कोलकाता या राज्य के बाहर छिपे अपराधियों की पहचान करने में मदद करेगा। अगर किसी दूसरे राज्य की पुलिस अपराधियों से सबूत बरामद करती है तो उस जानकारी को तुरंत शेयर किया जा सकता है, जिससे जांच में मदद मिलेगी। क्रि-मैक के जरिए राष्ट्रीय स्तर के अलर्ट भी मिल सकेंगे।