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पिस्टल दिखाकर धमकी दी गई, अखिलेश यादव हिंसा पर सपा का स्टैंड बताएं : अरविंद राजभर

पिस्टल

लखनऊ, 13 अगस्त (आईएएनएस)। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर ने अपने कार्यालय में पिस्टल दिखाकर धमकी दिए जाने के मामले को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

उन्होंने दावा किया कि एक व्यक्ति उनके कार्यालय में आया और कार्यालय प्रभारी के साथ विवाद के दौरान पिस्टल निकालकर उन्हें और सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर को धमकी दी। अरविंद राजभर ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि पुलिस को शिकायत दी गई है और वह चाहते हैं कि मामले का जल्द खुलासा हो।

अरविंद राजभर ने कहा कि घटना के समय वह कार्यालय में मौजूद नहीं थे और बस्ती के कार्यक्रम के लिए रवाना हो रहे थे। घटना उनके ही केबिन में हुई, जहां एक व्यक्ति ने कार्यालय प्रभारी से पहले बहस की और बाद में कथित तौर पर पिस्टल निकालकर धमकी दी।

उन्होंने कहा कि संबंधित व्यक्ति ने कार्यालय प्रभारी से कहा कि ओमप्रकाश राजभर और अरविंद राजभर को बता दिया जाए कि समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के खिलाफ कुछ न बोलें। विवाद बढ़ने के बाद उस व्यक्ति ने पिस्टल निकालकर कार्यालय प्रभारी की ओर तान दी और कहा कि वह अरविंद राजभर को खोजने आया था। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर धमकी देते हुए कहा कि अगर अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के खिलाफ दोबारा बयान दिया गया तो इसका परिणाम अच्छा नहीं होगा। इस पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कार्यालय प्रभारी ने कंप्यूटर का कीबोर्ड उठाकर आरोपी पर वार किया, जिससे पिस्टल नीचे गिर गई। इसके बाद आरोपी कथित तौर पर पिस्टल उठाकर कार्यालय से बाहर भाग गया। कार्यालय के बाहर तक उसका पीछा किया गया, लेकिन वह लगातार धमकी देता रहा।

उन्होंने कहा कि उन्हें आशंका है कि यह सोची-समझी साजिश हो सकती है। उन्होंने इस आशंका को पूर्व में शिवपाल यादव की ओर से ओमप्रकाश राजभर को लेकर दिए गए बयान से भी जोड़कर देखा।

कुछ समय पहले शिवपाल यादव ने ओमप्रकाश राजभर के लिए 'विशेष इलाज' की बात कही थी। इसके जवाब में उन्होंने शिवपाल यादव से पूछा था कि वह किस तरह के 'विशेष इलाज' की बात कर रहे हैं।

इसके बाद कथित धमकी की घटना को लेकर उन्होंने आशंका जताई कि कहीं यह राजनीतिक बयानबाजी से जुड़ा दबाव बनाने का प्रयास तो नहीं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से जल्द से जल्द घटना का खुलासा करने की मांग की।

अरविंद राजभर ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से इस मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि धमकी देने वाला व्यक्ति वास्तव में सपा का समर्थक या कार्यकर्ता होने का दावा कर रहा था, तो अखिलेश यादव को स्पष्ट करना चाहिए कि पार्टी का इस तरह की धमकी और हिंसा के प्रति क्या रुख है। राजनीतिक मतभेदों का जवाब तर्क और लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाना चाहिए, न कि बंदूक या धमकी के जरिए। सोशल मीडिया पर भी उन्हें धमकियां दी जाती रही हैं और कथित तौर पर कुछ लोगों ने उन्हें अखिलेश यादव के खिलाफ बोलना बंद करने की चेतावनी दी है।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ धमकी भरा वीडियो भी प्रसारित किया गया था। यदि राजनीतिक विरोध के कारण किसी नेता या उसके परिवार को धमकाया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।

अरविंद राजभर ने कहा कि वह गरीबों, युवाओं और वंचित समाज के अधिकारों की बात करते हैं और किसी भी धमकी के कारण अपनी राजनीतिक आवाज बंद नहीं करेंगे। उनकी राजनीति सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से पिछड़े समुदायों को आगे बढ़ाने के मुद्दे पर केंद्रित है। उन्होंने अर्कवंशी, बंजारा, खंगार और अन्य पिछड़े एवं वंचित समुदायों के अधिकारों की बात करते हुए कहा कि इन समाजों को राजनीतिक रूप से मजबूत करने के प्रयास जारी रहेंगे।

आजम खान को गृहमंत्री बनाए जाने संबंधी शिवपाल यादव के बयान पर भी अरविंद राजभर ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शिवपाल यादव खुली आंखों से ऐसे सपने देख रहे हैं, जो पूरा होना संभव नहीं है। आजम खान को लेकर उन्होंने कहा कि अदालत से जुड़े मामलों में कानून अपना काम करता है और किसी व्यक्ति को राजनीतिक पद देने की चर्चा करते समय उसके खिलाफ चल रहे मामलों और न्यायिक स्थिति को भी ध्यान में रखना चाहिए। इस तरह के बयान अपराधियों के मनोबल को बढ़ा सकते हैं। देश में बड़ी संख्या में शिक्षित और योग्य युवा हैं, जिन्हें राजनीति और नेतृत्व में आगे आने का अवसर मिलना चाहिए।

अरविंद राजभर ने समाजवादी पार्टी के पीडीए के नारे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व की बात करने वाली राजनीति में सभी वंचित समुदायों के सम्मान और अधिकार को वास्तविक रूप से जगह मिलनी चाहिए। समाजवादी पार्टी के नेताओं की ओर से विभिन्न पिछड़े और अति-पिछड़े समुदायों को लेकर दिए गए कथित बयानों को भी जनता ने देखा है। जिन समुदायों को लंबे समय तक राजनीतिक और सामाजिक रूप से पीछे रखा गया, उनकी आवाज को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने युवाओं से राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि देश और प्रदेश की राजनीति में नई पीढ़ी को नेतृत्व की कमान संभालने की जरूरत है।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से महिलाओं को स्वरोजगार के लिए करीब 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दिए जाने के प्रस्ताव पर अरविंद राजभर ने कहा कि महिला को शुरू में 20 हजार रुपए और इसके बाद 10 हजार रुपए की तीन किश्तों में सहायता दिए जाने की बात सामने आई है। यदि इस तरह की योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों की उन महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत किया जाता है, जिनके पास हुनर तो है लेकिन रोजगार या व्यवसाय शुरू करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, तो यह एक उपयोगी पहल हो सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं को वास्तविक रूप से सशक्त बनाने के लिए केवल आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं है, बल्कि लड़कियों की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि प्रदेश की बेटियों की शिक्षा को प्राथमिक विद्यालय से लेकर उच्च शिक्षा तक निशुल्क करने की दिशा में ठोस प्रावधान किया जाए। महिला सशक्तीकरण के मुद्दे को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार, कौशल विकास और शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने से ही उन्हें दीर्घकालिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम