पार्टियों को तोड़ने की राजनीति लोकतंत्र के लिए घातक: कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप

पार्टियों को तोड़ने की राजनीति लोकतंत्र के लिए घातक: कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप

मुंबई, 18 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में कथित 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप ने गुरुवार को इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि देश में राजनीतिक दलों को कमजोर करने और तोड़ने की कोशिशें लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और सांसदों पर दबाव बनाए जाने, उन्हें डराने-धमकाने और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किए जाने जैसी बातें सामने आ रही हैं, जो चिंताजनक हैं।

आईएएनएस से बातचीत के दौरान भाई जगताप ने कहा कि उन्हें ऑपरेशन टाइगर की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि कुछ सांसदों को कथित तौर पर प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। ऐसी चर्चाएं हैं कि कुछ जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाया गया, उन्हें डराया-धमकाया गया और राजनीतिक व आर्थिक ताकत का इस्तेमाल कर उनके फैसलों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। जगताप ने कहा कि अगर किसी राजनीतिक दल को तोड़ने या खत्म करने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि देश में बहुमत वाली सरकार पर भी इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया में ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि कथित तौर पर एडवांस भुगतान किए जाने जैसी बातें कही जा रही हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत दावा नहीं है, बल्कि मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसी चर्चाएं सामने आई हैं। यदि लोगों को पुराने मामलों में फंसाने की धमकी देकर या जांच एजेंसियों के दबाव के जरिए राजनीतिक रूप से प्रभावित किया जा रहा है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में ऐसी घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के उस बयान पर, जिसमें समाजवादी पार्टी में संभावित टूट की बात कही गई है, भाई जगताप ने कहा कि उन्हें पूरे मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है, इसलिए उस पर सीधी टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि महाराष्ट्र में इस तरह की राजनीतिक गतिविधियों की चर्चा हो रही है, तो संभव है कि दूसरे राज्यों में भी ऐसी परिस्थितियां देखने को मिलें। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ पुराने मामलों को निकालना, केंद्रीय एजेंसियों की जांच का दबाव बनाना और अन्य तरीकों से राजनीतिक दबाव पैदा करने की प्रवृत्ति बढ़ी है।

उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन दबाव और भय के माहौल में राजनीति होना स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं माना जा सकता।

नीट परीक्षा के दोबारा आयोजित होने के बीच टेलीग्राम पर लगाए गए प्रतिबंध पर भी भाई जगताप ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी या पेपर लीक जैसी घटनाओं के लिए केवल किसी एक एप्लीकेशन को जिम्मेदार ठहराना समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के मामलों में विभिन्न लोगों की गिरफ्तारी हुई है और ऐसी घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सवाल केवल टेलीग्राम या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का नहीं है, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का है जिसमें परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कांग्रेस एमएलसी ने कहा कि देशभर में लाखों छात्र और उनके परिवार बेहतर भविष्य की उम्मीद में भारी आर्थिक और मानसिक दबाव झेलते हैं। कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज लेते हैं या अपनी जमीन-जायदाद तक बेच देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली में धांधली होती है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान उन मेहनती छात्रों को उठाना पड़ता है, जो ईमानदारी से तैयारी करते हैं। जगताप ने कहा कि परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियां छात्रों के मनोबल को प्रभावित करती हैं और यह देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ के समान है। उन्होंने मांग की कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए, ताकि छात्रों और अभिभावकों का विश्वास बहाल हो सके।

--आईएएनएस

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