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पार्क बिल वापस लेने पर कर्नाटक भाजपा ने किया पलटवार, कहा- दिल्ली से कंट्रोल हो रहे हैं डीके शिवकुमार

पार्क

बेंगलुरु, 4 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा नेता आर. अशोक ने शुक्रवार को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के उस बयान पर तंज कसा, जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस सरकार हर कन्नड़ भाषी की बात सुनती है।

अशोक ने आरोप लगाया कि पार्क की पांच प्रतिशत जमीन का इस्तेमाल दूसरे विकास कार्यों के लिए करने की इजाजत देने वाले बिल को वापस लेने से मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की असलियत सामने आ गई है कि वे एक "रिमोट-कंट्रोल्ड" मुख्यमंत्री हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर सरकार का बचाव करने वाले सुरजेवाला के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक ने आरोप लगाया कि शिवकुमार राज्य सरकार को स्वतंत्र रूप से नहीं चला रहे हैं, बल्कि दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से निर्देश ले रहे हैं।

अशोक ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "सुरजेवाला जी, उस बात की पुष्टि करने के लिए धन्यवाद जो सात करोड़ कन्नड़ लोग पहले से ही जानते थे कि डी.के. शिवकुमार एक रिमोट-कंट्रोल्ड मुख्यमंत्री हैं और कर्नाटक ने अब तक जितने भी मुख्यमंत्री देखे हैं, उनमें वे सबसे कमजोर हैं।"

सुरजेवाला के इस दावे पर तंज कसते हुए कि सरकार हर कन्नड़ व्यक्ति की बात सुनती है, अशोक ने कहा कि बिल को वापस लेने से यह साबित होता है कि कांग्रेस सरकार ने शुरू में बेंगलुरु की हरियाली वाली जगहों को लेकर जनता की चिंताओं को नजरअंदाज किया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के विरोध और नागरिकों की चिंताओं के बावजूद सरकार ने पार्क की जमीन के पांच प्रतिशत हिस्से को दूसरे कामों के लिए इस्तेमाल करने की इजाजत देने वाले प्रावधान को लागू करने की कोशिश की थी।

अशोक ने आरोप लगाया, "बिल वापस ले लिया गया। दिल्ली ने सख्ती दिखाई। सीएम शिवकुमार ने घुटने टेक दिए।"

उन्होंने दावा किया कि इस प्रावधान के खिलाफ भाजपा के विरोध और जनता के बढ़ते विरोध के कारण सरकार को बिल वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।

अशोका ने यह भी आरोप लगाया कि कर्नाटक में सुरजेवाला की मौजूदगी मुख्यमंत्री के पीछे हटने के फैसले को समझाने की कोशिश थी, न कि राज्य सरकार का जनता की राय पर स्वतंत्र रूप से प्रतिक्रिया देना।

कांग्रेस नेता के इस दावे का मजाक उड़ाते हुए कि सरकार कन्नड़ लोगों की बात सुनती है, अशोक ने कहा कि सरकार ने लगातार विरोध का सामना करने के बाद ही बात सुनी।

उन्होंने कहा, "भाजपा ने इस प्रावधान का विरोध किया और जनता के विरोध ने सरकार को इसे वापस लेने के लिए मजबूर किया। इसे झूठ कहने से तथ्य नहीं बदलेंगे।"

अशोक ने आगे आरोप लगाया कि शिवकुमार कर्नाटक के हित में स्वतंत्र रूप से फैसले लेने के बजाय दिल्ली में राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेताओं के निर्देशों के अनुसार काम कर रहे थे।

अशोका ने कहा, "यह नेतृत्व नहीं था। यह रिमोट-कंट्रोल से किया गया सरेंडर था।" उन्होंने अपना यह आरोप दोहराया कि शिवकुमार एक "डमी सीएम" हैं, जिनकी सरकार दिल्ली से नियंत्रित होती है।

--आईएएनएस

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