मुंबई, 8 अगस्त (आईएएनएस)। प्रोफेसर जी.एन. साईबाबा की पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम और उसमें कथित तौर पर लगाए गए नारों से जुड़े मामले में मुंबई की सेशन कोर्ट ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) के सात छात्रों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने सात छात्रों को अग्रिम जमानत दे दी, जबकि दो अन्य छात्रों की जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
जिन दो छात्रों को राहत नहीं मिली, उनमें कमाख्या दास और अभिरूप पॉल शामिल हैं। अदालत ने दोनों के मामलों में पुलिस की ओर से पेश की गई सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले डेटा और जांच के दौरान हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता को महत्वपूर्ण माना।
मामला टीआईएसएस परिसर में आयोजित उस कार्यक्रम से जुड़ा है, जिसमें पूर्व दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और कार्यकर्ता जी.एन. साईबाबा को श्रद्धांजलि दी गई थी। पुलिस का आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान साईबाबा को श्रद्धांजलि देने के अलावा उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई की मांग को लेकर नारे भी लगाए गए थे। दोनों के खिलाफ यूएपीए के तहत मामले चल रहे हैं।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि किसी दिवंगत व्यक्ति को श्रद्धांजलि देना या माओवादी लेखकों की ओर से प्रकाशित किताबें डाउनलोड करना अपने आप में कोई आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता। हालांकि, अदालत ने कहा कि पुलिस के मुताबिक छात्रों की गतिविधियां केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम तक सीमित नहीं थीं।
अदालत के मुताबिक, सात छात्रों के खिलाफ ऐसी कोई ठोस सामग्री सामने नहीं आई, जिसके आधार पर उनकी गिरफ्तारी जरूरी मानी जाए। वहीं, दास और पॉल के मामले में जांच एजेंसी ने माओवादी विचारधारा से संबंधित सामग्री, डिलीट किया गया डेटा और जांच में सहयोग न करने जैसे बिंदु उठाए। इसी आधार पर दोनों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज की गईं।
बता दें कि यह मामला अक्टूबर 2025 में टीआईएसएस परिसर में आयोजित एक अनधिकृत कार्यक्रम के बाद दर्ज एफआईआर से संबंधित है। नौ छात्रों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत का रुख किया था। मामले की सुनवाई पहले लंबित रही और बाद में केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर होने तथा न्यायाधीश के तबादले के कारण दोबारा सुनवाई हुई।