तुमकुरु, 8 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक की तुमकुरु पुलिस की ओर से पकड़े गए कथित टेरर-लिंक्ड सोशल मीडिया नेटवर्क की जांच से पता चला है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर ने गिरफ्तार युवकों को एक बड़ा ग्रुप बनाने और 50 से 60 सदस्य जोड़ने का निर्देश दिया था। साथ ही, उनकी गतिविधियों के लिए आर्थिक मदद का वादा भी किया था। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी साझा की।
जांचकर्ताओं के अनुसार राणा नामक हैंडलर ने कथित तौर पर इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए आरोपियों को कट्टरपंथी बनाया। उसने धीरे-धीरे बातचीत को धार्मिक चर्चाओं से हटाकर भड़काऊ बातों की ओर मोड़ दिया। बातचीत के दौरान उसने कथित तौर पर आरोपियों को 50 से 60 लोगों का एक ग्रुप बनाने और अपने निर्देशों के अनुसार उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए कहा। साथ ही, उन्हें असीमित आर्थिक मदद का भरोसा भी दिलाया।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि हैंडलर का मकसद सोशल मीडिया पर प्रभावित किए जा सकने वाले युवाओं का इस्तेमाल करके भारत में एक संगठित नेटवर्क बनाना था। फंड का वादा और ग्रुप को बढ़ाने के निर्देश अब चल रही जांच में एक अहम घटनाक्रम माने जा रहे हैं।
इस मामले में दो युवाओं, तुमकुरु के अल्लाबकाश (23) और दावणगेरे के जमीर खान (23) की गिरफ्तारी हुई है। उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए पाकिस्तान में मौजूद एक व्यक्ति से कथित संबंध होने के कारण गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत हिरासत में लिया गया था।
जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपी लगभग 20 दिनों तक इंस्टाग्राम, एक्स और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए हैंडलर के लगातार संपर्क में थे। बातचीत कथित तौर पर धार्मिक कंटेंट से शुरू हुई और बाद में बदला लेने और लोगों को एकजुट करने जैसी चर्चाओं में बदल गई।
पुलिस ने बताया कि हैंडलर ने कथित तौर पर पुरानी घटनाओं का जिक्र किया और समुदाय की शिकायतों के आधार पर नैरेटिव बनाकर आरोपियों को भावनात्मक रूप से प्रभावित करने की कोशिश की। उस पर यह भी शक है कि उसने आरोपियों को अन्य संपर्कों से मिलवाकर और ग्रुप-आधारित तालमेल को बढ़ावा देकर अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश की।
अधिकारियों ने बताया कि कर्नाटक पुलिस को सतर्क करने में केंद्रीय खुफिया जानकारी ने अहम भूमिका निभाई, जिसके बाद एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया गया और दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया। खबरों के मुताबिक हिरासत में लिए जाने से पहले आरोपियों में से एक फरार था।
पुलिस सूत्रों ने कहा कि जांच का दायरा अब यह पता लगाने के लिए बढ़ा दिया गया है कि क्या कथित नेटवर्क के हिस्से के तौर पर और लोगों को निशाना बनाया गया या भर्ती किया गया।
अधिकारी बातचीत की पूरी कड़ी का पता लगाने के लिए मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट से मिले डिजिटल सबूतों की भी जांच कर रहे हैं।
जांच जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि 50-60 सदस्यों का ग्रुप बनाने के कथित निर्देश किसी बड़ी योजना का हिस्सा थे या नहीं और क्या देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी कोशिशें की गई थीं।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोग आम युवा थे जो छोटे-मोटे काम करते थे। लगभग एक महीने पहले वे कथित तौर पर अलग-अलग इंस्टाग्राम के जरिए राणा के संपर्क में आए थे। बाद में उन्होंने एक्स पर कई बार बातचीत की और आखिरकार उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल कर लिया गया।
जांचकर्ताओं के अनुसार, शुरू में तो राणा ने इस्लाम और पैगंबर की शिक्षाओं के बारे में मैसेज शेयर किए, लेकिन बाद में वे ग्रुप की यूनिटी को ज्यादा उकसावे वाले तरीके से बढ़ावा देने लगे और धीरे-धीरे बातचीत को देश के खिलाफ बदला लेने के विचारों की ओर मोड़ने लगे।
जांच में यह भी पता चला कि राणा ने पुणे में एक धर्मगुरु की हत्या का जिक्र किया और बदला लेने की बात कही।
आरोप है कि उन्होंने ऐसी घटनाओं के लिए जरूरी तैयारियों पर चर्चा की और इस बात पर जोर दिया कि समुदाय को एकजुट रहना चाहिए और किसी को भी नहीं बख्शना चाहिए। पुलिस को यह भी शक है कि देश के कई हिस्सों में राणा के फॉलोअर्स हैं और उन्होंने गिरफ्तार युवकों को अपने बड़े नेटवर्क से जोड़ा था।
--आईएएनएस
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