नई दिल्ली, 7 जुलाई (आईएएनएस)। देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है, लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों तक पहुंचने की यात्रा पूरी होना अभी बाकी है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) 2.0 2025-26 की रिपोर्ट बताती है कि इस वर्ष भी कोई राज्य या केंद्रशासित प्रदेश सर्वोच्च तीन परफॉर्मेंस श्रेणियों में जगह नहीं बना सका। हालांकि, कई राज्यों ने अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है और नई श्रेणियों में प्रवेश किया है, टॉप पर नहीं पहुंच पाए हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि देशभर में 14.67 लाख से अधिक स्कूल हैं। इन स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या रिकॉर्ड 1.03 करोड़ तक पहुंच गई है। वहीं इन स्कूलों में लगभग 24.72 करोड़ विद्यार्थी हैं। 1.03 करोड़ शिक्षकों व 24.72 करोड़ छात्रों वाली यह भारतीय शिक्षा प्रणाली दुनिया की सबसे बड़ी शिक्षा व्यवस्थाओं में से एक है। इतने विशाल तंत्र की गुणवत्ता और प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए शिक्षा मंत्रालय हर वर्ष पीजीआई रिपोर्ट जारी करता है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में इस बार चंडीगढ़ देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला केंद्र शासित प्रदेश बनकर उभरा है। सर्वोच्च अंकों के साथ चंडीगढ़ ‘उत्तम-3’ ग्रेड में पहुंचने वाला देश का एकमात्र राज्य या केंद्रशासित प्रदेश बना है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशासनिक दक्षता और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में चंडीगढ़ ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ के बाद दूसरे नंबर पर दिल्ली, केरल, पंजाब तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव को ‘प्रचेष्टा-1’ श्रेणी में रखा गया है। वहीं, महाराष्ट्र, ओडिशा, गोवा, हिमाचल प्रदेश और लक्षद्वीप ने ‘प्रचेष्टा-2’ ग्रेड हासिल किया है। इसके अलावा 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को ‘प्रचेष्टा-3’ तथा 13 को ‘आकांक्षी-1’ श्रेणी में स्थान मिला है। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा विकसित पीजीआई 2.0 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के शैक्षिक प्रदर्शन का व्यापक मूल्यांकन करने वाला एक राष्ट्रीय मानक है। इसका उद्देश्य राज्यों की रैंकिंग करना नहीं, बल्कि उन्हें प्रदर्शन के आधार पर विभिन्न ग्रेड में वर्गीकृत करना है, ताकि सुधार की दिशा स्पष्ट हो सके और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिले।
पीजीआई-स्टेट्स व यूटी का ढांचा 1000 अंकों पर आधारित है और इसमें 70 संकेतकों को शामिल किया गया है। इन संकेतकों को दो प्रमुख श्रेणियों—परिणाम तथा सुशासन एवं प्रबंधन—में बांटा गया है। इनके अंतर्गत छह महत्वपूर्ण क्षेत्रों का मूल्यांकन किया जाता है। इनमें सीखने के परिणाम और गुणवत्ता, शिक्षा तक पहुंच, आधारभूत संरचना एवं सुविधाएं, समानता एवं समावेशन, प्रशासनिक प्रक्रियाएं व शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण शामिल हैं। इस मूल्यांकन के लिए यूडीआईएसई प्लस, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024, पीएम पोषण पोर्टल, प्रबंध पोर्टल और विद्यांजलि पोर्टल के आंकड़ों का उपयोग किया गया है।
शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों के साथ-साथ जिलों के प्रदर्शन को मापने के लिए पीजीआई-डी भी तैयार किया है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि शैक्षिक योजनाओं का वास्तविक प्रभाव जिला स्तर पर कितना दिखाई दे रहा है। पीजीआई-डी में 600 अंकों के अंतर्गत 70 संकेतकों का मूल्यांकन किया जाता है। इसमें सीखने के परिणाम, कक्षा शिक्षण की प्रभावशीलता, आधारभूत सुविधाएं, छात्र अधिकार, विद्यालय सुरक्षा, डिजिटल शिक्षा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है। यह ढांचा कुल 11 प्रमुख क्षेत्रों पर आधारित है, जिनमें शिक्षण गुणवत्ता, शिक्षक उपलब्धता, डिजिटल लर्निंग, स्कूल नेतृत्व विकास और धनराशि के प्रभावी उपयोग जैसे विषय शामिल हैं।
इस रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि देश के अधिकांश राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। कई राज्यों ने अपनी श्रेणी में सुधार किया है और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास किए हैं। फिर भी कोई भी राज्य अभी तक सर्वोच्च श्रेणियों तक नहीं पहुंच पाया है। इससे स्पष्ट होता है कि सीखने के परिणामों, बुनियादी सुविधाओं, शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षा प्रशासन के क्षेत्रों में अभी और व्यापक सुधार की आवश्यकता है।
दरअसल, पीजीआई 2.0 रिपोर्ट शिक्षा क्षेत्र के लिए एक दर्पण की तरह है, जो उपलब्धियों के साथ-साथ उन चुनौतियों को भी सामने लाती है जिन पर काम करना बाकी है। मंत्रालय का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में यह रिपोर्ट राज्यों और जिलों के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज का काम करेगी तथा गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
--आईएएनएस
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