पटना, 29 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर के बारे में टिप्पणी से विवाद खड़ा कर दिया है। इस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेताओं ने प्रतिक्रिया दी और प्रियांक खड़गे की आलोचना की।
भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे की समझ पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा, "बोलने से पहले आपको (प्रियांक खड़गे) अध्ययन करना चाहिए। प्रियांक खड़गे और उनके पिता मल्लिकार्जुन, जिस पार्टी में वे हैं और जिसकी वे दिन-रात तारीफ करते हैं, उन्हें उसका इतिहास पढ़ना चाहिए। इंदिरा गांधी ने वीर सावरकर के बारे में 'वीर' क्यों बोला। क्यों बोला कि वो भारत के अनमोल रत्न हैं?"
गुरु प्रकाश ने कहा कि प्रियांक खड़गे के पास न तो कोई तथ्य है और न ही कोई आंकड़ा। वे सिर्फ कुछ खास समूहों को खुश करने के लिए ऐसी टिप्पणियां करते हैं। यह दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है।
वहीं, जदयू एमएलसी और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि वे इतिहास का इस्तेमाल बेवजह विवाद पैदा करने के बजाय उसे समझने की कोशिश करें।
नीरज कुमार ने कहा, "इतिहास को बेवजह खंगालने की जरूरत नहीं है, बल्कि उसे समझने की जरूरत है। भारत की आजादी की लड़ाई में सुभाष चंद्र बोस के योगदान से कोई इनकार नहीं कर सकता। महात्मा गांधी, भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस के रास्ते और विचारधाराएं भले ही अलग-अलग रही हों, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य एक ही था, भारत की आजादी। हमें इतिहास से सीखना चाहिए, तथ्यों की जांच करनी चाहिए और हालात को समझना चाहिए, न कि बेवजह विवाद पैदा करने चाहिए।"
इसी बीच, तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद ने प्रियांक खड़गे की टिप्पणियों का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इतिहास को फिर से लिखने की कोशिशें हो रही हैं।
कीर्ति आजाद ने कहा, "प्रियांक खड़गे ने ऐतिहासिक तथ्य बताए हैं। इतिहास और शिक्षा को बदलने की कोशिशें हो रही हैं। जो लोग राष्ट्रवाद का दावा करते हैं, उन्हें अपने पिछले कामों के बारे में सवालों का जवाब देना चाहिए। जो लोग देश के मूल्यों को कमजोर करते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मैं प्रियांक खड़गे का पूरा समर्थन करता हूं।"
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भी खड़गे की बातों का समर्थन करते हुए कहा, "यह इतिहास का हिस्सा है। जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंडियन नेशनल आर्मी के लिए लोगों को एकजुट कर रहे थे और आजादी की लड़ाई में बलिदान का आह्वान कर रहे थे, तब सावरकर और भारतीय जनसंघ से जुड़े नेता एक अलग नजरिए की वकालत कर रहे थे। ये ऐतिहासिक तथ्य अच्छी तरह से दर्ज हैं। कोई नई बात नहीं कही गई है।"
--आईएएनएस
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