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'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार को घेरा, राहुल गांधी के छात्र संवाद का किया समर्थन

वन नेशन, वन इलेक्शन

नई दिल्‍ली, 23 अगस्‍त (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भाजपा के 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' एजेंडे की आलोचना की और राहुल गांधी के छात्रों से जुड़ने के प्रयास का समर्थन किया। उन्‍होंने कहा कि विरोध कर रहे छात्रों को अपनी मांग रखने का संवैधानिक अधिकार है। साथ ही उन्होंने आरक्षण में सुधार की वकालत भी की।

आरक्षण पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बयान पर शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, "मैं भी यही कह रही हूं, बातचीत जरूरी है। मेरा हमेशा से मानना ​​रहा है कि चर्चा होनी चाहिए। अगर कोई सिस्टम लागू है तो क्या सभी को उसका फायदा मिल रहा है? ओबीसी समुदाय को देखिए, एससी समुदाय को देखिए, जहां भी आरक्षण दिया जाता है, क्या उन समूहों के सभी वर्गों को इसका बराबर फायदा मिल रहा है? यह सवाल पूछना जायज है।"

चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण किसी की दी हुई खैरात नहीं है, बल्कि यह देश के नागरिकों का एक मौलिक संवैधानिक अधिकार है।

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के बयान पर प्रियंका चतुर्वेदी कहती हैं, "मुझे नहीं पता कि डिप्टी सीएम किस हैसियत से यह बयान दे रहे हैं। जैसा कि सब जानते हैं, वे खुद उत्तर प्रदेश सरकार में बिना किसी अधिकार के बैठे हैं। मैंने उन्हें कभी यूजीसी गाइडलाइंस या किसी और गाइडलाइंस पर आवाज उठाते नहीं देखा। अब वे कहते हैं, 'हम बात करेंगे।' वे किससे बात करेंगे? और मैं पूछना चाहती हूं, क्या जंतर-मंतर पर कोई भी विरोध-प्रदर्शन कर सकता है, या वहां सिर्फ कुछ चुनिंदा लोग ही विरोध कर सकते हैं?"

दरअसल, आरक्षण सुधार आंदोलन को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पुलिस अनुमति नहीं दे रही है। इस पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि वह केंद्र सरकार के सामने बात रखेंगे।

'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "यह सिर्फ एनडीए का प्लान तो नहीं हो सकता, है ना? लोकतंत्र में सत्ताधारी पार्टी के साथ-साथ विपक्ष भी होता है। चुनाव आयोग, सुरक्षा ढांचा और पूरा चुनावी सिस्टम होता है। अगर एनडीए कहे कि इसे करना है और बस कर दिया जाए, तो यह कैसा लोकतंत्र है? जब एक कमेटी बनाई गई है और रिपोर्ट तैयार की जा रही है, तो वे ऐसा प्रस्ताव कैसे ला सकते हैं? यह फिर से ध्यान भटकाने की कोशिश है।"

उन्‍होंने कहा कि देश में कई अहम मुद्दे हैं। पहले वंदे मातरम का विवाद खड़ा कर दिया, नीट पेपर को दोबारा करवाना पड़ा है। देश में चीनी की किल्‍लत से जनता परेशान है। नौकरी की सबसे बड़ी समस्‍या है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के छात्रों के साथ संवाद का समर्थन करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह बहुत महत्‍वपूर्ण विषय है। कोई तो ऐसा वर्ग है जो छात्रों के दर्द और पीड़ा को समझना चाहता है। जो कोई छात्र समुदाय के हितों की बात करे, उसके सहयोग के लिए तैयार रहना चाहिए और उसका स्‍वागत करना चाहिए।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी