Balram Das Gadi : डिप्टी सीएम प्रवती परिदा ने मां लक्ष्मी मंदिर समेत अन्य परियोजनाओं का किया शिलान्यास

उपमुख्यमंत्री ने पुरी में मां लक्ष्मी मंदिर और बलराम दास गादी का शिलान्यास किया।
ओडिशा: डिप्टी सीएम प्रवती परिदा ने मां लक्ष्मी मंदिर समेत अन्य परियोजनाओं का किया शिलान्यास

पुरी: उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा ने बुधवार को गोप ब्लॉक के वेदपुर पंचायत के बलराम दास गादी में मां लक्ष्मी मंदिर और श्री बलराम दास गादी के जीर्णोद्धार के लिए शिलान्यास किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि लोगों की लंबे समय से चली आ रही ख्वाहिशें अब पूरी होने जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि भक्त-कवि बलराम दास को कवि, संत और भक्त के तौर पर बड़े पैमाने पर जाना जाता है। उनकी रचना लक्ष्मी पुराण में समाज सुधार, छुआछूत का विरोध और महिलाओं के सशक्तिकरण का कॉन्सेप्ट साफ तौर पर दिखता है। वे भक्ति आंदोलन के एक मुख्य समर्थक और भक्ति युग के पंचसखा के खास सदस्यों में से एक थे।

माना जाता है कि अपनी भक्ति और लगन से बलराम दास को इस पवित्र जगह पर भगवान जगन्नाथ और मां लक्ष्मी के एक साथ दिव्य दर्शन हुए थे। इसलिए, इस जगह को 'गुप्त श्रीक्षेत्र' भी कहा जाता है।

लक्ष्मी पुराण ओडिया संस्कृति, परंपरा और विरासत का प्रतीक है। डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि इस प्रोजेक्ट को लगभग 28 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा, और इस मंदिर के बनने से इस इलाके में टूरिज्म की संभावना काफी बढ़ जाएगी।

श्री बलराम दास गादी ओडिशा के पुरी जिले में गोप क्षेत्र के एरबंगा गांव में स्थित एक पवित्र समाधि स्थल है। यह भक्त कवि बलराम दास की समाधि और उनके द्वारा स्थापित गुप्त क्षेत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। बलराम दास ओडिया साहित्य के भक्ति युग के पंचसखा में सबसे वरिष्ठ संत-कवि थे। उनके पिता सोमनाथ महापात्र और माता महामाया देवी थीं।

वे गजपति राजा प्रतापरुद्र देव के दरबार में मंत्री रह चुके थे, लेकिन चैतन्य महाप्रभु के संपर्क में आने के बाद उन्होंने राजकीय सेवा त्याग दी और पूर्ण रूप से भक्ति मार्ग अपनाया। वे भगवान जगन्नाथ के परम भक्त थे। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना जगमोहन रामायण है, जो ओडिया भाषा में रामायण की पहली पूर्ण कृति मानी जाती है।

--आईएएनएस

 

 

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