भुवनेश्वर, 3 जुलाई (आईएएनएस)। ओडिशा के स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग ने कक्षा 1 से 4 तक की नई पाठ्यपुस्तकों में पाई गई संभावित गलतियों को लेकर व्यापक जनभागीदारी की अपील की है। परिषद ने शिक्षकों, शिक्षाविदों, अभिभावकों, छात्रों और आम नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे इन किताबों में मौजूद किसी भी प्रकार की त्रुटि की जानकारी साझा करें ताकि आगामी संस्करणों में आवश्यक सुधार किए जा सकें।
एक सार्वजनिक सूचना में स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग ने स्पष्ट किया है कि किताबों में तथ्यात्मक गलतियां, भाषा संबंधी त्रुटियां, टाइपिंग या प्रिंटिंग की गलतियां या किसी भी प्रकार की कमी को रिपोर्ट किया जा सकता है। इसके लिए लोगों को ईमेल या व्हाट्सएप नंबर 7008546111 पर सुझाव भेजने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही विद्या समीक्षा केंद्र की हेल्पलाइन 18003456722 भी सक्रिय की गई है, जहां से भी सुझाव लिए जा रहे हैं।
स्कूल और जन शिक्षा विभाग ने बताया कि कक्षा 1 से 8 तक की संशोधित किताबों को अंतिम रूप देने से पहले सार्वजनिक समीक्षा के लिए जारी किया गया है। विभाग और ओडिशा स्कूल शिक्षा कार्यक्रम प्राधिकरण की वेबसाइटों पर इन किताबों की डिजिटल प्रतियां अपलोड कर दी गई हैं, ताकि विशेषज्ञ और आम लोग उन्हें देखकर अपनी राय दे सकें। विभाग ने सभी हितधारकों से सात दिनों के भीतर सुझाव भेजने का आग्रह किया है।
स्कूल और जन शिक्षा सचिव एन. तिरुमाला नायक ने जानकारी दी कि प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही पाठ्यपुस्तकों को अंतिम रूप दिया जाएगा और फिर उनका प्रकाशन किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक संशोधित और अंतिम पुस्तकें उपलब्ध नहीं होतीं, तब तक शिक्षकों और छात्रों को सही जानकारी अलग से उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि पढ़ाई की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए तैयार की जा रही नई पाठ्यपुस्तकों में सामने आई कमियों के बाद उठाया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, कक्षा 1 से 8 तक की किताबों में कुल 1,678 तथ्यात्मक, टाइपिंग और प्रिंटिंग से जुड़ी गलतियाँ पाई गई थीं, जिसके बाद राज्यभर में नाराजगी देखने को मिली।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने कार्रवाई भी की है। टीचर ट्रेनिंग और ओडिशा स्कूल शिक्षा कार्यक्रम प्राधिकरण के पूर्व निदेशक सहित चार अधिकारियों और तीन सहायक निदेशकों को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा छह अन्य अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
सरकार का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना और यह सुनिश्चित करना है कि प्राथमिक स्तर के छात्रों को सही, सटीक और त्रुटिरहित अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो।