नई दिल्ली, 27 अगस्त (आईएएनएस)। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भारतीय नौसेना ने एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। देश में निर्मित पहला बहुउद्देश्यीय पोत ‘समर्थक’ 27 अगस्त को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया। इस पोत का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड के कट्टुपल्ली शिपयार्ड में किया गया है।
‘समर्थक’ की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुउद्देश्यीय क्षमता है। इसे किसी एक विशेष काम तक सीमित नहीं रखा गया है। जरूरत के मुताबिक यह पोत कई तरह के समुद्री अभियानों में भूमिका निभा सकता है। नौसेना का यह नवीनतम जहाज समुद्री निगरानी और टोह अभियान व समुद्र में गश्त में निपुण है। इसके अलावा विभिन्न नौसैनिक गतिविधियों के लिए सहायता प्रदान करने में सक्षम है। यह जहाज मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में सहयोग से जुड़ी गतिविधियां को अंजाम दे सकता है।
नौसेना के मुताबिक ‘समर्थक’ में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। यह पोत भारतीय नौसेना के लिए सिर्फ एक नया जहाज नहीं, बल्कि देश में विकसित और निर्मित नौसैनिक प्लेटफॉर्म की क्षमता का भी उदाहरण है। इसे एक बहुउद्देश्यीय परीक्षण और मूल्यांकन प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया गया है। यानी नौसेना अलग-अलग प्रणालियों और तकनीकों के परीक्षण तथा उनके मूल्यांकन के लिए इसका इस्तेमाल कर सकेगी।
इस तरह ‘समर्थक’ भारतीय नौसेना के लिए ऐसा प्लेटफॉर्म होगा, जिसे बदलती ऑपरेशनल जरूरतों के अनुसार अलग-अलग भूमिकाओं में इस्तेमाल किया जा सकेगा। जहाज का नाम ‘समर्थक’ है। इसका अर्थ है समर्थन देने वाला या किसी कार्य को आगे बढ़ाने वाला। यह नाम इसके उद्देश्य को भी स्पष्ट करता है।
दरअसल ‘समर्थक’ का नौसेना में शामिल होना भारत की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता के लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल इस बात को दर्शाता है कि भारत रक्षा क्षेत्र में घरेलू डिजाइन, निर्माण और औद्योगिक क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है। भारतीय नौसेना को इसकी डिलीवरी ऐसे समय हुई है, जब हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री निगरानी और समुद्री सुरक्षा की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में बहुउद्देश्यीय और स्वदेशी पोत नौसेना की परिचालन क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू रक्षा उद्योग को भी मजबूती देते हैं।
--आईएएनएस
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