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नवीन पटनायक ने एमएमडीआर संशोधन बिल का किया विरोध, कहा-ओडिशा की वित्तीय स्वायत्तता को होगा नुकसान

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भुवनेश्वर, 19 अगस्त (आईएएनएस)। बीजू जनता दल (बीजद) अध्यक्ष और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने हाल ही में पारित 'माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट' (एमएमडीआर एक्ट) में संशोधन का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे ओडिशा के वित्तीय संसाधनों और राज्य व वहां के लोगों के हितों पर बुरा असर पड़ेगा।

एक वीडियो संदेश में पटनायक ने कहा कि जब 2000 में उनकी सरकार सत्ता में आई थी, तब ओडिशा की अर्थव्यवस्था खराब हालत में थी और राज्य को ओवरड्राफ्ट पर निर्भर रहना पड़ता था। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि जब 2024 में सरकार बदली, तो उनकी सरकार 50,000 करोड़ रुपए का रेवेन्यू सरप्लस (राजस्व अधिशेष) छोड़कर गई थी।

उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय 'मजबूत वित्तीय प्रबंधन' को दिया और कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान ओडिशा ने तेजी से विकास, गरीबी में कमी, बुनियादी ढांचे में बढ़ोतरी और कई कल्याणकारी पहल देखीं। पटनायक ने कहा, "इस तेज विकास में माइनिंग टैक्स (खनन कर) ने अहम भूमिका निभाई। वर्तमान में ओडिशा की अर्थव्यवस्था खतरे में है।"

पटनायक ने कहा कि 'माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट' में हालिया संशोधन संसद में बिना पर्याप्त चर्चा के पारित किया गया और इससे ओडिशा को भारी नुकसान होगा। राज्यसभा में केवल बीजद सांसदों ने ही इस संशोधन का कड़ा विरोध किया।

पटनायक ने कहा, "मैंने इस बिल का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। मैंने उनसे सर्वदलीय बैठक और विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का भी अनुरोध किया है। ओडिशा और वहां के लोगों के हितों से बड़ा कोई नहीं है। आज हमें किसी पार्टी के हित के लिए नहीं बल्कि अपनी धरती और अपने लोगों के हित के लिए एकजुट होना होगा।"

पटनायक ने कहा कि ओडिशा में क्रोमाइट, बॉक्साइट, लौह अयस्क, कोयला और मैगनीज का देश का सबसे बड़ा भंडार मौजूद है लेकिन इस संशोधन से खनिज संसाधनों पर राज्य का नियंत्रण कमजोर हो जाएगा। उन्होंने कहा, "हम अपने लोगों की भलाई के लिए अपनी खदानों से टैक्स क्यों नहीं वसूल सकते? हमारे लोग धूल और धुएं का सामना करेंगे जबकि दिल्ली हमारे संसाधनों से अमीर बनेगी। हम ऐसा नहीं होने देंगे।"

पटनायक ने दावा किया कि बदले हुए कानून से ओडिशा को टैक्स से मिलने वाला पैसा काफी कम हो जाएगा और हर साल हजारों करोड़ रुपए का नुकसान होगा।

उन्होंने कहा कि इस पैसे का इस्तेमाल स्कूल, कॉलेज और अस्पताल बनाने के साथ-साथ सड़कें, पुल, बिजली का इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरे विकास कार्यों में किया जा सकता था। उन्होंने पूछा, "इससे नए कल्याणकारी कार्यक्रमों को मदद मिल सकती थी और किसानों व गरीब लोगों को फायदा हो सकता था। क्या ओडिशा इतना बड़ा नुकसान झेल सकता है?"

पटनायक ने यह भी सवाल उठाया कि अगर राज्य के वित्तीय संसाधन कम हो गए तो वह आने वाली पीढ़ियों को क्या जवाब देगा। उन्होंने पूछा, "हम अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों को क्या बताएंगे? जेन-जी के भविष्य का क्या होगा?" पटनायक ने कहा कि अपने 24 साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने केंद्र में अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के सत्ता में होने के बावजूद ओडिशा के हितों की रक्षा की। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 में ओडिशा में सरकार बदलने के बाद राज्य केंद्र की 'दया' पर निर्भर हो गया है।

उन्होंने कहा, "आपने लोकसभा में ओडिशा से 20 भाजपा सांसद भेजे लेकिन उनमें से किसी ने भी इस धरती के लिए आवाज नहीं उठाई। वे राज्य और उसके हितों के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाने में बुरी तरह नाकाम रहे।" पटनायक ने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक ने हमेशा राज्यों के विकास के लिए वित्तीय आजादी के महत्व पर जोर दिया था। ओडिशा के लोग राज्य को कमजोर करने की उस 'खतरनाक साजिश' को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा, "यह धरती हमारी है। ये खदानें हमारी हैं। मैं अपने लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ूंगा। अपनी आखिरी सांस तक, ओडिशा और उसके लोगों के अधिकारों के लिए मेरी लड़ाई जारी रहेगी।" पटनायक ने ओडिशा के लोगों से राज्य के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

--आईएएनएस

एससीएच/पीएम