हैदराबाद, 11 जून (आईएएनएस)। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में देश के छह प्रमुख महानगरों के विकास को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु को वैश्विक स्तर के शहरों में बदलने के लिए प्रत्येक शहर में 1 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया जाए और इसके लिए एक विशेष 'एम-6 सिटीज टास्क फोर्स' का गठन किया जाए।
नई दिल्ली में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा कि ये छह महानगर भारत की अर्थव्यवस्था के असली इंजन हैं। देश की लगभग 10 प्रतिशत आबादी इन शहरों में रहती है, और ये शहर भारत के कुल जीडीपी का करीब एक-चौथाई हिस्सा पैदा करते हैं। इसके बावजूद ये शहर अभी दुनिया के प्रमुख महानगरों के मुकाबले पीछे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन शहरों का विकास खर्च नहीं, बल्कि निवेश है, क्योंकि यही शहर देश के लिए राजस्व, रोजगार और वैश्विक पहचान पैदा करते हैं। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि इन महानगरों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने के लिए एक सशक्त राष्ट्रीय टास्क फोर्स बनाई जाए।
रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए भी केंद्र का सहयोग मांगा। उन्होंने कहा कि हैदराबाद के अगले विकास चरण के लिए रीजनल रिंग रोड बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उद्योग, लॉजिस्टिक्स और नियोजित आवासीय विकास को नई गति मिलेगी।
उन्होंने भारत फ्यूचर सिटी को आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम (बंदर) डीप-वॉटर पोर्ट से जोड़ने के लिए 12-लेन एक्सप्रेसवे की मांग भी रखी। इसके अलावा, उन्होंने हैदराबाद मेट्रो रेल फेज-2 को मंजूरी देने, मूसी नदी पुनर्जीवन परियोजना के लिए सहायता और 30 हजार एकड़ में विकसित किए जा रहे 'नेट-जीरो ग्रीनफील्ड भारत फ्यूचर सिटी' के लिए वित्तीय सहयोग देने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने एस. जयपाल रेड्डी पलामुरु-रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई परियोजना को मंजूरी देने की भी अपील की। साथ ही उन्होंने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत एपीएमपी सुविधा, ओसैट क्लस्टर और माइक्रो-एलईडी फैब्रिकेशन यूनिट स्थापित करने तथा हैदराबाद में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) खोलने का आग्रह किया।
सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना 'विकसित भारत 2047' के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के साथ पूरी तरह जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था ज्ञान आधारित होगी, इसलिए विश्वस्तरीय शिक्षा, कौशल विकास और अनुसंधान संस्थानों की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप राज्य सरकार हार्वर्ड, एमआईटी, स्टैनफोर्ड, ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज और इनसीड जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को तेलंगाना लाने की दिशा में काम कर रही है। इस दिशा में पहली बड़ी सफलता मिली है, क्योंकि यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन हैदराबाद में अपना ऑफशोर कैंपस स्थापित करने जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा, पर्यावरण और रोजगार (ईईई मॉडल) पर आधारित नॉलेज क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। विश्वस्तरीय संस्थानों, शिक्षकों और छात्रों की मौजूदगी से हैदराबाद में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटरों की संख्या बढ़ेगी और बड़े पैमाने पर निवेश आएगा।
रेवंत रेड्डी ने बताया कि 2024 में राज्य सरकार ने 3.55 करोड़ लोगों और 242 जातियों को शामिल करते हुए सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, रोजगार, राजनीतिक और जाति सर्वेक्षण कराया था। इस सर्वेक्षण से पता चला कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता संबंधी गंभीर कमियां हैं और सरकारी स्कूलों पर लोगों का भरोसा कम हो रहा है।
उन्होंने कहा कि अब केवल शिक्षा की पहुंच बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुणवत्ता और बेहतर परिणामों पर ध्यान देने का समय आ गया है।
--आईएएनएस
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