नई दिल्ली/रांची, 11 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की शासी परिषद की 11वीं बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य से जुड़े कई लंबित मुद्दे उठाए और केंद्र सरकार से सहयोग की मांग की।
उन्होंने जल जीवन मिशन की बकाया राशि जारी करने, कोयला कंपनियों पर राज्य के 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान करने, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाने और लंबित मेडिकल कॉलेज परियोजनाओं को मंजूरी देने की मांग की।
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड को केवल खनिज उत्पादक राज्य के रूप में नहीं, बल्कि उद्योग, विनिर्माण और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य में खनिज संसाधनों के स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन और उनसे जुड़े उद्योगों की स्थापना पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा, मानव संसाधन और कृषि क्षमता का बेहतर उपयोग कर राज्य को 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भागीदार बनाया जा सकता है। सोरेन ने केंद्र से क्रिटिकल मिनरल्स आधारित उद्योगों, अनुसंधान संस्थानों और नवाचार केंद्रों के विकास में सहयोग का अनुरोध किया। साथ ही टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और एग्रो-फूड प्रोसेसिंग क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।
सीएम ने कहा कि राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास के क्षेत्र में कई पहलें की गई हैं। उन्होंने झारखंड में पीएमश्री विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तथा एनसीईआरटी का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार 5,000 उत्कृष्ट विद्यालय विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। कौशल विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को उल्लेख करते हुए सोरेन ने कहा कि सारथी योजना के तहत लाखों युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है और उन्हें एआई, ड्रोन, इलेक्ट्रिक वाहन तथा सौर ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों के लिए तैयार किया जा रहा है।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने पीपीपी मॉडल पर प्रस्तावित छह मेडिकल कॉलेजों में शेष दो को मंजूरी देने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए यह जरूरी है।
इसके अलावा झारखंड में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने तथा राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी का अवसर देने का आग्रह किया। सोरेन ने कहा कि झारखंड के कई जिले डीवीसी, सीसीएल, ईसीएल और अन्य केंद्रीय उपक्रमों के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं। इन इलाकों में सामाजिक आधारभूत संरचना के विकास के लिए भूमि संबंधी प्रक्रियाओं में आवश्यक छूट और सरलीकरण की जरूरत है।
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