नासिक, 19 सितंबर (आईएएनएस)। नासिक-त्र्यंबकेश्वर में होने वाले सिंहस्थ कुंभ को लेकर आयोजित बैठक में अखाड़ों के बीच बेहतर समन्वय, साधु-संतों के निवास, ठहरने और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। बैठक में सभी अखाड़ों के एकजुट होकर आपसी सहयोग के साथ कुंभ को भव्य और दिव्य स्वरूप देने पर जोर दिया गया। संतों ने कहा कि कुंभ के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु नासिक-त्र्यंबकेश्वर पहुंचेंगे, ऐसे में व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन और अखाड़ों के बीच लगातार संवाद जरूरी है।
बैठक में संतों ने कहा कि वैष्णव अखाड़ों समेत सभी अखाड़ों से आने वाले संतों के लिए रहने और ठहरने की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए। साथ ही, देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को भी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान देना होगा। संतों ने कहा कि स्थानीय महंतों और अखाड़ों के यहां पहुंचने वाले साधु-संतों तथा भक्तों के भोजन और आवास की व्यवस्था को भी व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
महामंडलेश्वर श्री रामसनेहीदास महाराज ने बैठक को सार्थक बताते हुए कहा कि 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विचार रखे और कुंभ को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि नासिक की ओर से देशभर में यह संदेश जाना चाहिए कि प्रयागराज की तरह नासिक-त्र्यंबकेश्वर में भी भव्य और दिव्य कुंभ का आयोजन होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि 31 अक्टूबर से महाराष्ट्र के नासिक जिले में कुंभ का आयोजन शुरू होने जा रहा है। त्र्यंबकेश्वर और गोदावरी तट से जुड़े क्षेत्रों में होने वाले इस आयोजन को लेकर उन्होंने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से समय पर पहुंचने की अपील की। कुंभ की अवधि लंबी होने के कारण श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार यहां पहुंचकर धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कर सकते हैं।
महामंडलेश्वर ने कहा कि बैठक में साधु-संतों की ओर से व्यवस्थाओं को लेकर संतोष व्यक्त किया गया। कुंभ में आने वाले संतों और अखाड़ों को पर्याप्त सुविधाएं मिलना जरूरी है। स्थानीय स्तर पर आने वाले साधु-संत अक्सर पहले स्थानीय महंतों या अखाड़ों के यहां ठहरते हैं, इसलिए उनके भोजन, निवास और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। वैष्णव अखाड़ों के संत भी कुंभ के दौरान बड़ी संख्या में पहुंचेंगे और सभी के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को लेकर सहमति बनी है।
बैठक में संतों ने नासिक की जनता से भी अपील की कि कुंभ के दौरान देशभर से आने वाले साधु-संतों और श्रद्धालुओं का अतिथि के रूप में स्वागत करें तथा प्रशासन और अखाड़ों के साथ सहयोग करें। संतों ने कहा कि कुंभ केवल साधु-संतों तक सीमित आयोजन नहीं है, बल्कि इसका आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पूरे समाज से जुड़ा है।
संतों ने यह भी कहा कि गोदावरी तट और त्र्यंबकेश्वर की पवित्र भूमि पर होने वाले सिंहस्थ कुंभ को भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए सभी अखाड़े मिलकर काम करेंगे। अधिक से अधिक श्रद्धालुओं की भागीदारी सुनिश्चित करने और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए आगामी दिनों में भी अखाड़ों और प्रशासन के बीच निरंतर संवाद और समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया।
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