नीमच, 4 अगस्त (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर नारी' और 'लखपति दीदी' के संकल्प को मध्य प्रदेश के नीमच जिले की ग्रामीण महिलाओं ने जमीनी स्तर पर नई पहचान दी। घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सफल उद्यमी बनकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि गांवों में रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए मॉडल भी स्थापित कर रही हैं।
नीमच विकासखंड में अब तक 3850 महिलाएं 'लखपति दीदी' श्रेणी में पहुंच चुकी हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
नीमच विकासखंड के स्वयं सहायता समूह अब केवल बचत और छोटे ऋण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए उद्यमिता, स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन चुके हैं। विकासखंड में 1287 स्वयं सहायता समूह, 118 ग्राम संगठन और 12 क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) सक्रिय हैं। इन समूहों से जुड़ी हजारों महिलाओं में से 3850 महिलाओं का लखपति श्रेणी में पहुंचना इस अभियान की सफलता को दर्शाता है।
महिलाएं अब किराना और मनिहारी की दुकानों, आटा चक्की, पोल्ट्री फार्म, आरओ प्लांट, दीदी कैफे, उचित मूल्य की राशन दुकानों सहित अनेक छोटे-बड़े व्यवसायों का सफल संचालन कर रही हैं। इन पहलों ने न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है, बल्कि गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ाए हैं।
विकास खंड प्रबंधक, जनपद पंचायत नीमच राजेंद्र कुमार चौहान ने बताया कि नीमच जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) का संचालन अगस्त 2018 से किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों को बैंक लिंकेज के माध्यम से पहले चरण में 1.50 लाख रुपए, दूसरे चरण में 3 लाख रुपए और तीसरे चरण में 6 लाख रुपए तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा रिवॉल्विंग फंड (आरएफ) और सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) के माध्यम से भी महिलाओं को आर्थिक गतिविधियां शुरू करने के लिए वित्तीय सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस वित्तीय सहायता का सकारात्मक प्रभाव गांवों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। धनेरिया कलां में महिलाओं द्वारा आरओ प्लांट, दो फोपल्या में पोल्ट्री फार्म, जबकि अन्य गांवों में किराना, मनिहारी, चप्पल की दुकानों सहित कई स्वरोजगार इकाइयां सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं। जिला कार्यालय और जनपद पंचायत परिसर के सामने संचालित 'दीदी कैफे' भी महिला स्वावलंबन का प्रेरक उदाहरण बन चुका है।
ग्राम उगरान की कृष्णा कीर ने बताया कि वर्ष 2021 में जय भवानी स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक सहयोग मिला, जिससे उन्होंने मनिहारी की दुकान शुरू की। दुकान में उन्होंने साड़ियां, बच्चों के रेडीमेड कपड़े, जनरल स्टोर का सामान और चप्पल रखना शुरू किया। वर्ष 2023 में उन्हें उचित मूल्य की राशन (पीडीएस) दुकान का संचालन भी मिला। आज दुकान और पीडीएस से होने वाली आय के जरिए वह प्रतिमाह लगभग 15 से 20 हजार रुपए कमा रही हैं। कृष्णा का कहना है कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलता है और अधिक से अधिक महिलाओं को इसका लाभ उठाना चाहिए।
चंगेरा गांव की राकेश कुंवर ने बताया कि वर्ष 2018 में एनआरएलएम से जुड़ने के बाद उन्होंने किराना दुकान, उचित मूल्य की राशन दुकान, मनिहारी की दुकान और आटा चक्की का संचालन शुरू किया। पहले उनके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था, लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल गई। आज वह अपने व्यवसाय से होने वाली आय के जरिए अपनी तीनों बेटियों की पढ़ाई और परवरिश की जिम्मेदारी स्वयं निभा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार की महिला हितैषी योजनाएं ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
चंगेरा गांव की शारदा बाई, जो जय मां वैष्णवी स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं, ने बताया कि समूह से मिले ऋण के माध्यम से उन्होंने छोटी सी दुकान शुरू की। पहले वह केवल गृहिणी थीं, लेकिन अब दुकान से होने वाली आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं के लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया।
डुंगलावादा गांव की अन्नू बैरवा ने बताया कि श्री गणेश स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें क्रमशः 1.50 लाख, 3 लाख और 6 लाख रुपए तक का ऋण मिला। इस सहायता से उन्होंने किराना दुकान शुरू की और धीरे-धीरे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की। बाद में अपनी बचत से उन्होंने अपने पति के लिए वेल्डिंग और लेथ मशीन का व्यवसाय भी शुरू कराया। आज दोनों मिलकर परिवार की आय बढ़ा रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। अन्नू ने आगे कहा कि स्वयं सहायता समूहों ने उन महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है, जो पहले घर से बाहर निकलने में संकोच करती थीं।
--आईएएनएस
पीएसके/डीकेपी





