नैनीताल, 30 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तराखंड के नैनीताल में 'रन फॉर उत्तराखंड' थीम के तहत 15वीं नैनीताल मॉनसून माउंट मैराथन का आयोजन किया गया। इस मैराथन में देश-विदेश के सैकड़ों धावकों ने हिस्सा लिया।
हरियाणा से आई ज्योति ने 21 किलोमीटर वर्ग में पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "यह बहुत अच्छा आयोजन था और मैंने यहां पर फर्स्ट पोजीशन प्राप्त की है। थोड़ा टफ लगता है, लेकिन सब कुछ अच्छा था। मैनेजमेंट भी अच्छा है और वॉलंटियर्स वगैरह भी सब कुछ अच्छा था।" ज्योति ने बताया कि वह सीनियर नेशनल मेडलिस्ट हैं और रेलवे विभाग में रायबरेली में ऑन ड्यूटी हैं।
युवा खिलाड़ियों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को खुद पर भरोसा रखना चाहिए और लगातार अभ्यास करते रहना चाहिए।
कोटद्वार के रहने वाले धावक प्रभु ने बताया कि उनके लिए नैनीताल की 21 किलोमीटर दौड़ कोई नई बात नहीं थी। वह इस दूरी की दौड़ कई बार पूरी कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि नैनीताल का रास्ता चढ़ाई और उतार-चढ़ाव से भरा था, लेकिन रूट पर रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था समेत बाकी इंतजाम अच्छे थे।
प्रभु तीन बार नेशनल मेडलिस्ट रह चुके हैं और खेलो इंडिया मीट में रिकॉर्ड भी बना चुके हैं। उन्होंने अल्मोड़ा, रुड़की और ऊधम सिंह नगर समेत कई जगहों पर मैराथन में हिस्सा लिया है।
प्रभु का कहना है कि उत्तराखंड में खिलाड़ियों को मिल रहा सरकारी सहयोग खेल को आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है। आर्थिक सहायता मिलने से नए खिलाड़ियों का हौसला बढ़ रहा है और गांवों से भी युवा खेलों की तरफ आ रहे हैं। उनका मानना है कि अगर यह समर्थन लगातार मिलता रहा तो उत्तराखंड से आने वाले एथलीट राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली और फिलहाल सीआरपीएफ में मेरठ में तैनात जयंती थपलियाल ने 45 प्लस कैटेगरी में पहला स्थान हासिल किया। जयंती ने बताया कि दौड़ के शुरुआती तीन किलोमीटर में उन्हें लगा कि वह आखिर कहां आ गई हैं और क्यों दौड़ रही हैं। लेकिन जैसे-जैसे वह आगे बढ़ीं, उन्हें रूट का मजा आने लगा। चढ़ाई और ढलान के बावजूद उन्होंने दौड़ पूरी की और अपनी कैटेगरी में जीत हासिल की।
जयंती अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खेल चुकी हैं और मलेशिया, जापान, सिंगापुर और अमेरिका जैसे देशों में भी प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। उन्होंने 2024 में बोस्टन में भी हिस्सा लिया था। उनके मुताबिक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दौड़ के रूट अलग हो सकते हैं, लेकिन अगर आपकी प्रैक्टिस मजबूत है तो आप किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं।
नैनीताल में उनका यह पहला अनुभव था और उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे भी यहां आने का मौका मिलेगा।
केन्या से आए धावक जॉन ने भी नैनीताल की पहाड़ी दौड़ में हिस्सा लिया। उन्होंने आयोजकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि रूट मैप अच्छा था, लेकिन कोर्स बेहद कठिन था।
जॉन के लिए पहाड़ पर दौड़ने का यह पहला अनुभव था। उन्होंने बताया कि पहले 10 किलोमीटर तक वह पीछे चल रहे थे। इसके बाद उन्होंने रफ्तार बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन पैर की मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द होने लगा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और जोर लगाते हुए दूसरे स्थान तक पहुंचने में कामयाब रहे।
जॉन इससे पहले कश्मीर, पुणे और बेंगलुरु समेत कई जगहों पर अंतरराष्ट्रीय दौड़ों में हिस्सा ले चुके हैं, लेकिन ज्यादातर रूट सपाट थे। उनके लिए नैनीताल की चढ़ाई एक बिल्कुल अलग चुनौती रही।
दौड़ के साथ-साथ जॉन नैनीताल की खूबसूरती के भी कायल हो गए। उन्होंने शहर को बेहद खूबसूरत बताया और यहां के लोगों की मेहमाननवाजी की तारीफ की। उनके मुताबिक नैनीताल के लोग खुशमिजाज हैं और बाहर से आने वाले लोगों का गर्मजोशी से स्वागत करते हैं।
--आईएएनएस
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