नई दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार अब छात्रों के रहने की व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए बड़े कदम उठा रही है। दिल्ली के मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी, साउथ कैंपस और आईपी यूनिवर्सिटी समेत कई प्रोफेशनल कॉलेजों के 30 से 40 छात्रों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं।
मंत्री से मिलने के बाद एक छात्र ने अपनी आपबीती सुनाई। छात्र ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "जैसा कि हम सभी जानते हैं, सत्य निकेतन में हुई घटना बहुत दुखद थी। मैं वहां मौजूद था और बस एक सप्ताह पहले ही अपने दोस्त के साथ वहां रुका था। मुझे पता है कि वहां हालात कितने खराब हैं। मैं मंत्री का बहुत आभारी हूं कि उन्होंने हमें बुलाया और अपने सुझाव बताने का मौका दिया।"
छात्र ने कहा कि पीजी अकोमोडेशन के लिए एक पॉलिसी की जरूरत है। पीजी लाइसेंसिंग के लिए पॉलिसी पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन नहीं किया जा रहा है। जवाबदेही तय होनी चाहिए।
छात्र ने बताया, "पीजी मालिक किराया बढ़ा देते हैं, तीन महीने की सिक्योरिटी डिपॉजिट लेते हैं, उसे वापस नहीं करते और बिजली का बिल अलग से लेते हैं। जब कोई छात्र पढ़ने के लिए दूसरी जगह से आता है, तो उनकी समस्याओं को कौन सुनेगा और उनका समाधान कौन करेगा।"
एक अन्य छात्र ने कहा, "सत्य निकेतन में हुई घटना सभी के लिए दुखद थी और पूरा देश इस पर चर्चा कर रहा है। दिल्ली शिक्षा का केंद्र है और जब देश के किसी भी हिस्से से कोई छात्र यहां आता है, तो सिर्फ छात्र ही नहीं आता, बल्कि उसके साथ उसका पूरा परिवार भी अपनी उम्मीदों और अपेक्षाओं के साथ आता है।"
छात्र ने आगे कहा कि इस घटना को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया गया, बल्कि इसे राष्ट्रीय हित के मुद्दे के तौर पर देखा गया। चाहे सत्ताधारी पार्टी हो, विपक्ष हो, छात्र संगठन हों या अलग-अलग राजनीतिक दल, सभी वहां पहुंचे और छात्रों की मदद की। सबसे अहम बात यह है कि इस घटना का राजनीतिकरण नहीं किया गया।
छात्रों के साथ बातचीत के बाद मंत्री आशीष सूद ने पत्रकारों से कहा, "मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी और दूसरे संस्थानों के उन स्टूडेंट्स को बुलाया है जो कॉलेज हॉस्टल और दूसरी रहने की सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। सोमवार शाम, एलजी और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग में, हमने शहर भर में चल रहे कोचिंग संस्थानों और पीजी को रेगुलेट करने के लिए जरूरी कानून या पॉलिसी लाने पर चर्चा की।"
उन्होंने बताया कि इसी सिलसिले में उन्होंने साउथ कैंपस और आईपी यूनिवर्सिटी के तहत आने वाले अलग-अलग प्रोफेशनल कॉलेजों के कुछ स्टूडेंट्स को बुलाया ताकि वे जिन दिक्कतों का सामना कर रहे हैं, उन्हें समझ सकें। इन स्टूडेंट्स ने कई मुद्दे उठाए, जैसे पीजी का किराया, मिलने वाली सुविधाएं, एग्रीमेंट का पालन, उन एग्रीमेंट के तहत जवाबदेही और अपनी सुरक्षा। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसी सभी जानकारी एक ही पोर्टल पर रजिस्टर होनी चाहिए, जिसमें सुविधाओं की उपलब्धता, रहने वालों की संख्या और सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, जैसी बातें शामिल हों।
--आईएएनएस
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